अंतर्मुखी यात्रा

18/07/2026 नमोकार हीलिंग ध्यान मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [ पिपराई गाँव

18/07/2026 नमोकार हीलिंग ध्यान मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [ पिपराई गाँव

मध्यम किसी भी समय Guided Meditation
ध्यान प्रारंभ करने से पहले

कुछ क्षण स्वयं के लिए

शांत स्थान चुनें, मोबाइल को साइलेंट करें और सहज अवस्था में बैठें।

इस ध्यान के बारे में

18/07/2026 नमोकार हीलिंग ध्यान मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [ पिपराई गाँव

ध्यान निर्देश

आराम से बैठ जाएँ।
अपनी रीढ़ को सहज रूप से सीधा रखें और धीरे से आँखें बंद कर लें।

अब अपना ध्यान अपनी श्वास पर लेकर आएँ।

धीरे-धीरे गहरी साँस लें…
और आराम से साँस छोड़ें…

एक बार फिर…
गहरी साँस अंदर लें…
और धीरे-धीरे बाहर छोड़ें…

ध्यान के लाभ

🧘 मन को शांत करने में सहायक — नियमित मंत्र-जाप ध्यान को एक बिंदु पर केंद्रित करने का अभ्यास बन सकता है।
🌿 तनाव और बेचैनी में मानसिक सहारा — शांत वातावरण में मंत्र-जाप मन को स्थिर और सहज महसूस कराने में मदद कर सकता है।
🎯 एकाग्रता का अभ्यास — मंत्र पर ध्यान रखने से बार-बार भटकते मन को वापस केंद्रित करने की आदत बनती है।
💛 सकारात्मक भावों का विकास — णमोकार मंत्र किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु के गुणों की वंदना है। इसलिए यह विनय और गुण-अनुसरण की भावना से जुड़ता है।
🪷 आत्मचिंतन और भाव-शुद्धि — नियमित जाप को ध्यान और आत्मनिरीक्षण के साथ जोड़ने पर व्यक्ति अपने विचारों और व्यवहार के प्रति अधिक सजग हो सकता है।
🌙 सोने से पहले मन को शांत करने की दिनचर्या — धीमे और एकाग्र भाव से जाप bedtime relaxation routine का हिस्सा बनाया जा सकता है।

ध्यान Transcript

Youtube
में ठीक तो आप लोग इसलिए जल्दी जल्दी आए तो बहुत अच्छी बात है। अभी णमोकार मंत्र को बाद में तो मैं आपको बहुत अच्छे डिटेल में सिखाऊंगा लेकिन अभी आज दीदी का कहना है तो उसको करा रहे हैं हम तो आप सिर्फ रफली समझ ले सबसे पहला है आसन। आसन अर्थात इसमें रीड को सीधा रखना है पूरे समय हिलना नहीं है। आप जितना कम इसमें शरीर को हिलाएंगे उतना अच्छा है। दूसरा प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा में हम अपने आप को बांधते हैं और प्रतिज्ञा करते हैं। तीसरा है प्राणायाम। प्राणायाम में शस नमो अरिहताण में शस को लेना है। नमो सिंण में छोड़ना है। नमो आरणम में लेना है। नमोणं में छोड़ना है। नमो लोहे में और सबसाण में छोड़ना है। कितने अच्छे बच्चे हैं बहुत बढ़िया। फिर उसके बाद दिग वंदना। चारों दिशाओं में हमें दिग्वंदना करनी है। फिर पांचवे नंबर पर ये जो हाथ है इन हाथ को पावर हैंड बनाना है। पावर हैंड से तात्पर्य इनमें पंच परमेष्ठी की स्थापना करना है। है ना? पंच परमेष्ठी आपने यहां पर सफेद कलर से इस पूरे हम अंगूठे को एकदम वाइट कर देंगे। और वाइट करने के बाद इसमें जो है अरिहंत परमेष्ठी स्थापना करेंगे। ऐसे करके फिर सिद्ध परमेष्ठी फिर आचार्य श्री जी फिर निर्यापक महाराज फिर साधु परमेष्ठी कलर सफेद लाल पीला हरा ग्रीन और काला ठीक ऐसे पांच कलर में अपन इसको कर देंगे और ये पंच परमेष्ठी में हाथ आगे पीछे सब तरफ बना के इनमें हम पंच परमेष्ठी स्थापना कर दी ताकि जब हम हाथ यू हिलाए और सब रोग पीड़ाएं कष्ट दूर दूर हो जाए। फिर उसके बाद हम चक्र तैयार करेंगे। एक सफेद कलर का, एक लाल कलर का, एक पीले। देखो इतना तो दिख जाएगा आपको। इतना तो दूर का दिखता होगा। दिख रहा है? ये दिख रहा है? नहीं दिख रहा? दिख रहा है। ठीक। तो ये जो चक्र है, इस चक्र को हमें बनाना है। है ना? तो चक्र है, कहां बनाना है? सिर के ऊपर। इसको तैयार करना है चक्र को यहां। है ना? है ना? तो यहां हम चक्र को तैयार करेंगे। तो चक्र तैयार होगा। पहले सफेद गोल फिर लाल फिर पीला फिर हरा फिर काला। ऐसा ये चक्र होगा तैयार। इस चक्र को हम इतने अच्छे से तैयार कर लेंगे ताकि किसी को हमें स्वस्थ करना हो तो इस चक्र को भेज के हम स्वस्थ करेंगे। अपने शरीर पर भी जहां बीमारियों हो, जहां कष्ट हो इस चक्र के माध्यम से स्वस्थ करेंगे। फिर उसके बाद हम अपने मन वचन काय को निर्मल करेंगे। मन को निर्मल करने के लिए हम क्या करेंगे? ऐसा पिरामिड बनाएंगे। क्रोधम क्रोधम जी नष्टम नष्टम जी ऐसे हम क्रोध को बाहर करेंगे मान को माया को लोभ को फिर मन को पवित्र करने के बाद उस मन में हम स्थापना करेंगे ओम नमः सबसे क्षमा मतलब यहां पर लिखे ओम नमः प्रेम क्षमा ओम नमः सबको क्षमा ओम नमः सबसे क्षमा है ना और ये जो मन है यहां पर हृदय यहां पर अष्टदली कमल है उन्हें हम अष्टद कमल में पांच कलरों से उस कमल को स्थापित करेंगे फिर उसके बाद वचन की बात आती है तो वचन को निर्मल ध्रुव वचन को निर्मल करने की प्रक्रिया से जोड़ेंगे और वचन को निर्मल करने के लिए हम क्या करेंगे वहां अपनी जिहवा इंद्री पर अप्रिय कटु कठोर वचनम नष्टम नष्टम ऐसा लिखेंगे ठीक है ना तो अप्री कटुचर नष्ट नष्टम नष्टम इन को अपन लिखकर मंत्रित करेंगे कहां पर लिखना है जवा पर विजुअलाइज करेंगे। फिर उसके बाद हम आएंगे वचन के बाद आएंगे काय पर। तो काय से जो अपना चक्र बना है ना यहां सिर पर उस चक्र को एंटीक्लॉक वाइज घुमाना है। एंटीक्लॉकवाइज किसको बोलते हैं? उल्टे हाथ तरफ। कैसे घुमाना है? उल्टे हाथ तरफ घुमाना है। उसको बोलते हैं उल्टे। हां। घड़ी कैसे चलती है? ऐसे चलती है। अच्छा ऐसे ऐसे चलती घड़ी तो ऐसे चलाना है। अच्छा देखो भैया ने बता दिया अनुभ बता रहे हैं कि घड़ी ऐसी चलती है। यूं यूं चलती है ना घड़ी ऐसे चलती है ना? ऐसे ऐसे कांटा चलता है। यूं यूं यू यू यू यू लेकिन अपने को कैसे चलाना है? यूं यूं यूं चलाना है। ठीक? ठीक है ना? यहां से ऐसा स्टार्ट करना है। यूं चलाना है। यूं नहीं चलाना है। है ना? उसको एंटीक्लॉकवाइज बोलते हैं। ऐसा अनुभव भैया का कहना है। ठीक है ना? तो ऐसे एंटीक्लॉकवाइज हमें घुमाना आएगा। तो ये कहां घुमाना है? जहां जहां हम बोलेंगे सिर, कंठ, हृदय है ना? जहां भी आपको विशेष तकलीफ उन स्थानों में एंटीक्लॉक वाइज घुमाना है। एंटीक्लॉकवाइज देखो ये बहुत जरूरी समझना है। कैसे समझना है? घड़ी एंटीक्लॉक वाइज। घड़ी कैसे चलती है? यूं। ठीक है ना? ऐसे चलते हैं। लेकिन हमें ऐसे नहीं चलाना है। हमें कैसे चलाना है? यूं। और फिर भावना क्या बहाने? एंटीक्लॉकवाइज में मेरी बीमारियां दूर हो रही है। मेरे रोग दूर हो रहे हैं। मेरी तकलीफ दूर हो रही है। ये आपको भावनाओं को प्रेषित करना है। ठीक है ना? एंटीक्लॉकवाइज करते हुए। फिर उसके बाद हम नमस्कार मुद्रा करेंगे। नमस्कार मुद्रा जो होती है वो ऐसी होती है कि हाथ जोड़ना है और हाथ जोड़ने के बाद यहां पर हम बोलेंगे एक मंत्र। आपको उस मंत्र को बोलना है। फिर उसके बाद नमस्कार मुद्रा के बाद आपको पांचों मुद्राएं करना है। अरहंत मुद्रा सॉरी अरहंत मुद्रा में क्या करना होता रहेगा कि हाथ को ऊपर ले जाना है। सिद्ध मुद्रा में ऐसे करना है। आचार्य मुद्रा में ऐसे करना है। उपाध्याय मुद्रा में टाटक करना है। इसको देखते हुए ऐसे है ना साधु मुद्रा में साधु परमेष्ठी के लिए जो मुद्रा होगी उस मुद्रा में नीचे झुकना है। फिर सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया और जो मैं आपको पांचवी स्टेप कराता हूं ना वो पांचवी स्टेप यहीं की अ और म इससे सबकी हेलीम करना है ओम ठीक है ना फिर उसके बाद एक ओम की संरचना अपने सामने करना है और इस ओम से ऊर्जाओं को लेना है ऐसा मानना है कि जहां मेरे जहां ज्यादा तकलीफ है उस अवयव पे वो ऊर्जा लेना है मुझे सफेद कलर की ये जो है ये शुद्ध ऊर्जा ग्रहण की क्रिया कहलाएगी। फिर उसके बाद चेतना केंद्र पर हमें ध्यान ले जाना है। यहां पर सफेद कलर, यहां लाल कलर, यहां पीला कलर, यहां हरा कलर, इससे आपको तो मौन रहना है लेकिन हम यहां से आपके चक्रों को एक्टिवेट करेंगे। अब जितने लोगों तक हमारा ध्यान जा पाएगा उतने लोगों की उस चक्र में अपनी जितनी हमारे अंदर की ऊर्जा वो भेजेंगे ताकि आपके चक्र एक्टिवेट हो। फिर उसके बाद अगली वाली जो मुद्रा है उसमें आपको खुद को ये मैंने कर दिया। आपके चक्र खोल दिए। फिर आपको अपने चक्र खोलना है और यहां पर सफेद कलर से स्वास शसोस में न मोर हंताण लिखना है। मैं बोलूंगा न आपको यहां ना लिखना है। सफेद मोह तो उसमें एक शस लेना है और छोड़ना है। तो नमो अरहताणं में सात बीजाक्षर सात स्वास में लिखना है। सफेद यहां पांच में नमो सिद्धाण यहां पीले अक्षर नमो आर्यणम कितने कितने शस लेना पड़ेंगे? नमोण बोल कितने सात नमो में हे भगवान इतनी देर लगेगी तो पीले कलर से नमो आरण हरे कलर से नमोण काले कलर से नमो इसका और सबसे अच्छा इसमें अगर आप पंच परमेष्ठी बना ले पंच पंच बना मतलब आप अपने मूल लायक भगवान को याद कर ले सिद्ध में सिद्ध आचार्य श्री आचार उपाध्याय में उपाध्याय बना ले कि कोई निर्यापक महाराज साधु में साधु बना ले कि ये वाले महाराज जी और उस पूरे में आप उनको ध्यान करके करेंगे तो फिर और थोड़ा सा पावर ऊर्जा बढ़ेगी। ठीक? तो यह पंच परमेष्ठी में आप अपने चक्र को एक्टिवेट करना है। आपने अपने चक्र एक्टिवेट कर लिए और अब चक्र एक्ट एक्टिवेट करने के बाद अब अगली जो हमारी आती है क्या आती है कि आभा मंडल को क्लियर करना। हमारे चारों तरफ के वातावरण को हम णमोकार मंत्र पढ़कर हमारे इस कहना चाहिए ऊर्जा को चारों तरफ के उसको ठीक करते हैं। सुरक्षा कवच जैसे अभी मैंने आपको वो चक्र बताया ऐसे सुरक्षा कवच को देखिए आप ये देख रहे हैं आप ये दिख रहा है शरीर के चारों तरफ ऐसे चक्र बनाना है आपको सफेद लाल पीला हरा और काला ये सुरक्षा कवच है ये इतना सुंदर कवच है अगर सच में सिद्ध कर लिया तो कोई बंदूक की गोली चलाएगा ना वो भी अंदर नहीं जाएगी इतना मत कोई तलवार चलाएगा तलवार के दो टुकड़े हो जाएंगे पर आपका तलवार ही ऐसा सुरक्षा कवच श्रद्धा के साथ अगर इसको सिद्ध कर लिया तो कोई भी दुर्भावनाएं आपके अंदर नहीं आ सकती उसके बाद है मतलब बहुत सुंदर सी योजना संयोजना पांच स्थान है हमारे उन पांचों स्थान में पांच मंत्रों को लिखना है यहां सफेद वर्ण से शांति यहां लाल से शुद्धि पीले से सहनशक्ति, हरे से संतोष और काले से सकारात्मकता। इस शब्द लिखना भर नहीं है। इन शब्दों के साथ हमें अपने को अंदर तक उतारना है। ठीक? तो अंदर तक उतारने का तात्पर्य कि इन शब्दों को लिखकर इस मेडिटेशन करना है। मैं शांत आत्मा हूं। मैं शशील आत्मा हूं। शुद्ध में मैंने जो पाप किए उनको सोचना है और पापों को स्वाहा समाप्त करना है। ठीक? तो ऐसे पूरे ये पांच 17 स्टेप मैंने आपको बताई। बहुत सुंदर ध्यान है। अभी मैंने मैंने आपको बहुत शॉर्ट में बताया है। है ना? जब मैं इसको 40 दिन का कोर्स कराऊंगा तो उसको बहुत अच्छे से बताऊंगा। लेकिन दीदी की भावना थी कि णमोकार मंत्र कराओ। बहुत से लोगों को बहुत श्रद्धान है। णमणोकार मंत्र पर। 42 दिन का कोर्स होता है पूरा। 42 दिन में आप एक हीलर बन जाएंगे। दूसरों को ठीक करने की ताकत आपके पास आ जाएगी। तो आप लोगों को आज तो कुछ होगा नहीं। हो सकता है कि ध्यान कठिन लगे क्योंकि मैंने इतना समझाया नहीं समझाने के लिए समय चाहिए और इतना समय है नहीं और मिनिमम 50 मिनट एनी हाउ कंडीशन ध्यान में चाहिए नहीं तो हो ही नहीं पाता 45 मिनट तो कम से कम चाहिए तो अब मैंने आपको बहुत श में समझाया है टूटा फूटा समझाया है लेकिन आप श्रद्धा के साथ करना ठीक आगे तो अच्छे से आपको पूरा डिटेल में समझाऊंगा मैं चलते हैं सबसे पहले अपन आसन बना ले रीड सीधी आंखें बंद दूर दूर हो सकते हैं। गर्मी लगेगी। अपने आप को फैला कर बैठे आप पंखे के नीचे बैठे कोई बाधा नहीं। है ना? पूरे मनोभाव के साथ बैठे आप और बिल्कुल आसन में आप बैठ गए और प्रतिज्ञा करें। मेरे साथ बोले ओम जय जय ओम जय जय निश्चय ही निश्चय ही निश्चय ही निश्चय णमोकार मंत्र हीलिंग समाप्त होने तक णमोकार मंत्र हीलिंग समाप्त होने तक सबको बोलना है वस्त्र और आसन के सिवा वस्त्र और आसन के सिवा सभी परिग्रहों का में समस्त परिग्रहों का में मन वचन मन वचन काय कृत मन वचन काय मन वचन काय कृत कार्य अनुमोदना कृत कार्य अनुमोदना समारंभ आरंभ पूर्वक समरंभ समारंभ पूर्वक त्याग करता हूं त्याग करता हूं हे भगवन नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु हे भगवन नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु और इस पूरे परिसर में जितने भी देवी देवता है उन सबको भी आपका जय जिनेंद्र और हमारा आशीर्वाद वे भी आए और हमारे साथ इस मांगलिक ध्यान की प्रक्रिया में शामिल चलते हैं बहुत ध्यान के साथ हमने ये अनुमोदना करी। अब दूसरी प्रक्रिया है प्राणायाम की ताकि शरीर पूरा रिलैक्स हो जाए। नौ बार णमोकार मंत्र बोला जाएगा। नमोताण में शस को लेना है। सिद्धाणम में नारायण में उज्जणम में नमो लोए में सबम में बिल्कुल बहुत अच्छा। चलते हैं आंखें बंद रे सीधी आप चाहे तो ध्यान मुद्रा में आ जाए। ठीक प्राणायाम बोले मनोभाव के साथ नौ बार नमो अरिहताम नमो सिंम नमो [गाना गाने की आवाज़] नमो अरे भैया गलती हो रही है आप लोगों को थोड़ी उच्चारण करना है आपको तो जीभ पीछे रखना है टमा जी पीछे रखे ऐसे शस ले छोड़े उच्चारण नहीं करें आप लोग उच्चारण तो महाराज जी महाराज जी कर रहे हैं और हम कर रहे हैं ठीक है ना नमो लोए सर अरहता नमो सिंम नमो अरणम नमो वजयाणं नमो लोए साहुम शस लेना है छोड़ना है आपको ठीक अपने अपने पंच परमेष्ठी आप बना ले उन पंच परमेष्ठी को याद करते हुए शस ले छोड़े नमो अरहताम नमो सिंम नमो आयरणम नमो वयाणं नमो लोए सबसाहु शस लेना है छोड़ना है ना आंखें जल्दी बंद करो ऋण सिद्धि करो फटाफट आंखें बंद करके रीड सीधी करते हुए नमो अरहताण में शस लेंगे नमो सिद्धाणम में शस को छोड़ेंगे नमो अरिहताणं नमो सिधाणं नमो अरणं नमो अजयाणं नमो लोए ससाहुणं नमो अरिहंताणं नमो सिधाणं नमो अरयाणं नमोयाणं नमो लोए सबम [गाना गाने की आवाज़] नमो अरहताम नमो सिंम नमो अरणम नमो अयाणम नमो लोए सबम नमो अरहताणं नमो सिंम नमो अरणं नमो अजयाणं नमो लोएसहुणं नमो अरहताणं नमो सिधाणं [गाना गाने की आवाज़] नमो नमो नमो लोए सबसाम नमो अरहताम नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] नमोणम नमो अजयम नमो लोए सबसाम और अब बहुत ध्यान के साथ आपने ये प्राणायाम प्रकरण को किया और अब बहुत ध्यान के साथ हम दिग वंदना करेंगे हाथ को जोड़ेंगे पूर्व दिशा की ओर करेंगे ओम ओम राम नमो पूर्व दिशा समान माम रक्ष रक्ष स्वाहा दक्षिण दिशा ओम आपके जो पंच परमेष्ठी आपने बनाए उनको याद करते हुए करना हमेशा याद होना चाहिए ओम नमो शम दक्षिण दिशा समगदान विघ्न निवारण माम रक्ष रक्ष स्वाहा अब आएंगे पश्चिम में आचार्य भगवान को देखें ओम नमो आर पश्चिम दिशा समदान विघ्न निवारण माम रक्ष रक्ष स्वाहा उत्तर ओम रोम नमो उणम उत्तर दिशा सम रक्ष रक्ष स्वाहा सर्व दिशाओं ओम नमो लो सर्व दिशा समक्ष रक्ष स्वाहा बहुत अच्छा और अब पूरे ध्यान के साथ आएंगे हाथ को जोड़ेंगे और अंदर हाथों को लेंगे अंगूठे को बाहर करेंगे देखो अंगूठे को बाहर करें पावर हैंड बनाना है बहन बहन चार उंगलियां अंदर करो। अंगूठे को बाहर करो। ठीक? ऐसे अंगूठे को बाहर किया हमने। अब आंखों को बंद करके ये जो अंगूठा है ना हां नीचे कर लो दादा जी। नीचे कर लो। हां बस ऐसे रखो। और इस अंगूठे में आंखों को बंद करके सफेद कलर करें। और यहां पर अपने मूल लायक भगवान जो आपने बनाया उनको स्थापित करें। देखें उनकी आकृति को देखें। बहुत ध्यान से देखें। ओम राम नमोस्ता नमः। अब तर्जनी अंगूठे को अंदर कर ले अंगूठे को अंदर करो ना भाई तर्जनी को बाहर करो ये वेरी गुड अब यहां पर आप सिद्ध भगवान को करना है लेकिन पहले लाल कलर कर ले पूरा लाल कलर ऑब्जर्व कर ले और लाल कलर कर दिया सिद्ध भगवान की आकर देखें ओम नमो सिद्धाणं तर्जनी नमः आगे मध्यमा बीच की बड़ी उंगली बहन बीच की बड़ी उंगली हां अब इसमें आचार्य भगवान को देखें आप ओम नमो आरम मधमाभ्याम नमः अब आगे वाली उंगली पर आएंगे आप हरा हरा कलर कर दें आने वाली उंगली पर और हरा कलर कर रहे हैं अनामिका पर आप और ये क्या यहां पर आप कोई भी निरापक महाराज को देखें बाकी उंगलियां अंदर ये अनामिका को बाहर ओम रोम नमो अनामिका नमः फिर बाद में सबसे छोटी कनिष्ठा इसी कनिष्ठा में आप काला कलर कर दें। साधु परमेष्ठी को यहां पर स्थापित कर दें। जो भी आपको लगता है कि महाराज जी है उसको उनको याद करते हुए देखें। ओम नमो कनिष् नमः बहुत ध्यान के साथ आपने साधु भगवंत को वहां पर स्थापित कर दिया है। और अब दोनों हाथों को खोलेंगे ऐसे। खोलो ऐसे और ये जो पांचो कलर है यहां तक और यहां तक दोनों ले आओ विजुअलाइज करो ओम रम अस कर तालाभ्यम नमः पलटाओ पीछे पीछे पलटाओ पलटाओ पीछे और ऐसे पीछे पलटा कर ये जो पांच कलर थे यहां और यहां ओम राम रम सा आकर प्रष्टाभ्याम नमः बस बहुत अच्छा ध्यान मुद्रा में आ जाए आप और अब हमें क्या करना है सबसे सुंदर जो मैंने चक्र बनाया था बताया था अभी बहुत सारे लोग नए आ गए मैं क्या करूं। कब तक बताऊं आप लोग लेट तो आते हो। ये चक्र देख रहे हैं आप सफेद लाल पीला हरा काला बहुत महत्वपूर्ण चक्र है ये। इस चक्र को सिर के ऊपर बनाना है। सफेद थाली अनुमा फिर लाल फिर पीला फिर हरा फिर काला। ठीक ये चक्र ही सब बीमारियों को दूर करने वाला है। सब पीड़ाओं को समन करने वाला है। तो यह चक्र अपन कैसे बनाएंगे? मैं यहां से बोलूंगा नमो अरहताम तो आप सफेद कलर यहां से निकालना अंगूठे से है ना और यहां एक सफेद गोल थाली फिर यहां से लाल निकालना सिद्ध। फिर मैं मैं सिर्फ उच्चारण करूंगा। आपको तो कलर निकालना है और चक्र बनाना है। ये मानना कि ये सब पंच परमेष्ठियों से जो हमने अपने यहां स्थापित किए इन हाथों से वो पंच परमेष्ठी में कलर निकल रहे हैं और ऊपर चक्र बन रहा है। तो बहुत सुंदर प्रक्रिया से इस चक्र को आपको तैयार करना है। है ना? तो आंखों को बंद शरीर को सीधा सिर के ऊपर पोछेंगे और पूरे ध्यान के साथ पांचों उंगलियों से कलर को निकालते हुए सबसे पहले सफेद गोल कलर का सूर्य थाली जैसा आकार सिर के ऊपर बनाएंगे। नमो अरिहंत एक गोलाकार बन गया उसके बाद एक लाल रिंग जैसा बनेगा उसके चारों तरफ नमो [गाना गाने की आवाज़] सिधाम फिर उसके ऊपर एक पीले कलर का रिंग चलेगा सफेद लाल के ऊपर पीले कलर का नमो आया हरियाणम फिर उसके बाद उसके ऊपर चारों तरफ हरे कलर का चलेगा जाया फिर उसके बाद काले कलर का चलेगा उसकी प्रणो लोए स देखिए सफेद घोल लाल पीला हरा और काला ऐसा चक्र हमारे सिर के ऊपर तैयार हो चुका हमने सिर के ऊपर चक्र को तैयार कर लिया है और अब मन निर्मलीकरण की क्रिया की ओर चलेंगे और बहुत ध्यान से हम अपने आप को पवित्र बनाने के लिए हम क्या करें ताकि हमारा मन पवित्र हो जाए तो मन पवित्र करने के लिए हमें अपने मन को पवित्र बनाना है तो क्रोध मान माया लोक को हटाना है तो क्या करें बहुत मनोभाव से सब लोग मिलकर एक बार णकार मंत्र पढ़े ताकि जो प्रक्रिया हम करने वाले हैं उसके लिए इतना पुण्य इकटठा हो जाए कि सद में हमारे मन की कषाय निकल निकल जाए उच्चारण करेंगे सब लोग मिलकर एक साथ करना है सबको नमो अरिहताणं नमो सिंम नमो आय रीयाणं नमो अजयम नमो लोए ससा साहुम और बहुत ध्यान के साथ आप क्या कर रहे हैं इस जो हमारा मन है वो कहां है हृदय पर है तो अपने देखो पिरामिड रूप में से हाथ को लाओ देखो ऐसे लाओ मेरी तरफ देखो मेरी तरफ देखो देखो ऐसे लाओ पिरामिड बनाओ और जो मैं शब्द बोल रहा हूं उसको दोहराते हुए वो भाव होना चाहिए और निकल जाना चाहिए जो चीज हम निकाल रहे हैं उसको निकालना है क्रोधम क्रोधम जी नष्टम नष्टम जी नष्टम नष्टम में बाहर फेंको निकालो ठीक मतलब क्या किया आपने क्रोध को बाहर फेंक दिया गुस्सा नहीं करना ठीक है ना मानम मानम जी नष्टम नष्टम जी क्या कर दिया अभिमान ईगो को बाहर कर दिया माया माया जी नष्टम नष्टम जी लोभम लोभम जी नष्टम नष्टम जी क्रोध मान माया लोभ चारों को हमने बाहर कर दिया है और चारों चीजें बाहर हो गई अब ध्यान की मुद्रा में बैठ जाए वापस ध्यान में आ जाए आंखों को बंद क्रोध मान माया को हमने निश्चित बाहर कर दिया है और अब ये जब क्रोध मान माया लोग बाहर हो ही चुके हैं तो क्या करें हम अपने हृदय पर पहुंचे हृदय पर पाखड़ी बीचोबीच में देखें अष्टदली पाखड़ी है अब वो बहुत सुंदर सुंदर पाखड़ी है तो हम उन पाखड़ियों में और करणिका में हम अपने जो मूलनायक भगवान उनको याद करो उनको नमोस्तु करो और अपने अंगूठे से देखो सफेद कलर निकल रहा है और हमारी बीच की करणिका सफेद हो गई है हृदय पर जो अष्ट कमल है और फिर देखते हैं तो दो पांखुड़ियां सिद्ध भगवान को याद करते तर्जनी से लाल कलर निकल रहा है और वो दोनों पखुड़िया लाल हो गई फिर देखते हैं मध्यमा से पीला कलर निकल रहा है आचार्य भगवान को याद करें फिर दो पाखड़ियों में पीला कलर हो गया। फिर हम अपने कोई भी निर्यापक महाराज जी को याद करें और अनामिका उंगली से हरा कलर निकल रहा है। आगे की दो पाखड़ी हरी हो गई। फिर हम साधु भगवंत को याद करें। काले कलर निकल रहा है। हमारी सबसे कनिष्ठा से और देखें तो दो पाखड़िया काली हो गई। अब देखो मन पर देखो कितना सुंदर कमल बन गया है। बीच में सफेद पाखड़ी फिर सॉरी करने का। फिर लाल पाखड़िया दो पीली दो हरी दो। काली दो चाहे तो आप चेंज कर करके बना सकते हैं। सफेद लाल पीली हरी काली लेकिन बस आपको वो पखुड़िया पंच परमेष्ठी में बनाना है और पंखुड़ियां बन गई और उन पंखुड़ियों पर आपने अपने हृदय कमल पर स्थापित भी कर दिया है। अब जब आपने क्रोध मान माया लोभ समाप्त कर तो अब आप निश्चित मानना कि आपके अंदर प्रेम और क्षमा इन दो की हमें स्थापना करना है। क्योंकि निश्चित है कि जब यह सब कशाएं समाप्त हो गई तो हम प्रेम देने वाली आत्मा बन गए। हम क्षमा करने वाली आत्मा बन गए तो बड़े मनोभाव के साथ अपने हृदय कमल पर लिखें। बहुत अच्छे से लिखें और वहां पर अंकित कर दें और इन शब्दों को दोहराएं। ओम नमः ओम नमः प्रेम क्षमा प्रेम क्षमा ओम नमः ओम नमः सबको क्षमा सबको क्षमा ओम नमः ओम नमः सबसे क्षमा सबसे क्षमा बिल्कुल आपने लिख दिया प्रेम और क्षमा को अपने हृदय कमल पर और स्थापित कर दिया प्रेम और क्षमा को और अब निश्चित आप सबको प्रेम देना सबको क्षमा करना ठीक है ना अब हम क्या करें। वचन को निर्मल करने की प्रक्रिया से जुड़ते हैं और वचन को निर्मल करने की प्रक्रिया से जोड़ते हैं तो हमारे जिव्वा में अपकटु कठोर वचन बहुत निकलते हैं। हमें उनको नष्टम नष्टम करना है। तो एक बार णमोकार मंत्र का उच्चारण करते हैं। और इस णमोकार मंत्र के उच्चारण में हमें बहुत मनोभाव से जो है अपने कटु कठोर वचन को समाप्त करना है और वहां पर क्या हितम प्रिय वचन को लिखना है तो बहुत अच्छे से आप एक बार णमोकार मंत्र का उच्चारण करो अपने पंच परमेष्ठी को याद करते हुए ताकि सच में हमारे जीवा से कटु कठोर वचन निकल जाए उच्चारण सब लोग मिलकर नमो अरहता नमो नमो सिंम नमो आयम नमो अजयम नमो लोए सब सांम और देखो बहुत ध्यान से अब आप अपनी जिवा इंद्र पर लिखो लिखना पड़ेगा आपको और रिपीट करो ओम नमः ओम नमः बोलो ना ओम नमः ओम नमः हितमित प्रिय वचनः हित प्रिय वचन जिवा पर ये शब्द लिखो ओम ओम नमः ओम नमः हितमित प्रिय वचन हित प्रिय वचना ओम नमः ओम नमः हितमित प्रिय वचन हित प्रिय वचन आपको जिव्वा पर ये शब्द आपने लिख दिए निश्चित अब हितमित प्रिय वचन ही आपके जिव्वा से बाहर होंगे हां आप निश्चित मानना कि मेरी इस जिवा से मीठे और सबके मन को छूने वाले वचन निकलेंगे। अब काया को निर्मल करते हैं। यह प्रक्रिया बहुत सुंदर है। जो लोग अस्वस्थ है इसको बहुत मनोभाव से करना। वो जो चक्र बनाया था ना उस चक्र को एंटीक्लॉक वाइज मैंने बताया था ना घड़ी उल्टी दिशा में घुमाना है आपको। है ना? सीधी नहीं घुमाना है। ऐसे चक्र को जिन स्थानों पर मैं बोलूं वहां घुमाना है और भावना बाना है। मेरे शरीर की बीमारियां दूर हो रही है। हां। इतना रिजल्ट है इसका कि राजपुर में एक मां ने अपनी गठान एक ही सिंग में गला ली थी। चक्र घुमाया और उनकी जो गठान है वो पूरी की पूरी गल गई। पूरी बाहर हो गई। पूरी पिचक गई। ध्यान से इस चक्र को घुमाए और जहां बीमारी है वहां तो और अच्छे से घुमाना है। तो मैं यहां से णमोकार मंत्र का पाठ करेंगे। आप एंटीक्लॉक वाइज घुमाना। तीन बार सिर में एक बार कंठ गर्दन में, एक बार हृदय पर, एक बार दाहिने कंधा, एक बार बाया कंधा, एक बार पीठ, एक बार पेट। चलते हैं। सबसे पहले सिर के ऊपर तीन बार। यहां आपको सिर्फ घुमाना है। जीभ पीछे रखकर। विजुअलाइज करना उल्टे एंटी क्लॉकवाइज और भावना क्या बनाना है मेरी रोग दूर हो रहे हैं सिर के रोग दूर हो रहे हैं नमो अरताण नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] नमोणं नमो वयाणं नमो लोए साहहुण नमो अरिहताणं नमो सिंम नमो अरणं नमो वजाणं नमो लोए सबसाहुण नमो अरिहताणं नमो सिद्ध [गाना गाने की आवाज़] नमोण नमोण नमो लोए सबसा सिर पर घूम रहा था अब आपको सर्वाइकल है थायराइड है टॉन्सिल्स है तो गले में और गर्दन में घुमाए नमो अरहताणं नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] भावना भाव मेरी बीमारी दूर हो रही है नमोणं नमोणं नमो लोए साहण अबजन शोल्डर दाहिने कंधे पर आपको घुमाना है ऊपर से ले नीचे नीचे तक घुमाना है भावना भाना है मेरा दर्द समाप्त नमो अरिहताणं नमो सिणं नमो अरियणं नमोयाणं नमो लोएस साहम और अब बाएं कंधे में बाएं हाथ रख पूरा घुमाए नमो अरिहताणं नमो सिंम एंटीक्लॉकवाइज चक्र को घुमाओ नमो आयरण नमोणं नमो लोएसा अब हार्ट ब्लॉकेज खोलने के हृदय पर घुमाओ नमो अरिहताण नमो सिणं नमो आयणम नमो अजयम नमो लोए सब हदय के बाद अब आप आए और अपने पेट पर घुमाए नमो अरहताम नमो सिधाणं [गाना गाने की आवाज़] नमो अरणं नमो अजयाणं नमो लोए सबम अब आप पीठ पर घुमाए पीछे की ओर घुमाए नमो अरहताणं नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] नमो नमो नमो लोए साहम अब उस चक्र को नीचे नाभि के नीचे घुमाते जाए नीचे ले जाए नाभि के नीचे घुमाए और नीचे की ओर चक्र जा रहा है और दाहिनी जगहों पर घुमाए और दाहिनी जगहों के बाद घुटना पिंडलियां एड़ी पंजा बाएं पैर की जगहों पर घुटना पिंडली एड़ी पंजा घूमता चला चला जा रहा है। बहुत ध्यान से आपने घुमा के बाहर किया और अब पूरे मनोभाव के साथ आपने चक्र को घुमाया और चक्र घूमता चला गया। बाहर होता चला गया। अब हम पूरे मनोभाव के साथ यह मान रहे हैं कि हमारी सारी बीमारियां दूर हो गई है। निश्चित रूप से हमारे रोग सब समाप्त हो गए। लेकिन फिर भी आपको लगता है कि मेरा कोई विशेष अवयव बहुत परेशान करता है। मेरी आंख, मेरा कान, मेरा पेट, मेरी रीड, मेरा घुटना। तो उस स्थान पर आप संपूर्ण आरोग्य की स्थापना करें। लिखें आप पूरे मनोभाव से। इन शब्दों को लिखें, इन मंत्रों को लिखें। बहुत ध्यान से लिखें। पूरे मनोभाव से लिखेंगे वहां पर। उन शब्दों को, उन मंत्रों को लिखेंगे। ओम नमः ओम नमः संपूर्ण आरोग्य संपूर्ण आरोग्य ओम नमः ओम नमः संपूर्ण आरोग्य संपूर्ण आरोग्य ओम नमः ओम नमः संपूर्ण आरोग्य संपूर्ण आरोग्य अब ध्यान रखना जिनको कोई बीमारी ना हो वो अपने ललाट पर इन शब्दों को लिखा करें ओम नमः संपूर्ण आरोग्य ठीक है ना अब हम मुद्राओं की ओर चलते हैं और हाथ जोड़ें सब लोग हाथ जोड़ें हां हाथ जोड़े ना भैया ऐसे हृदय पर रखें हृदय पर रखें और नौ बार हम इस मुद्रा के साथ चलेंगे नमस्कार मुद्रा से ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम सबको बोलना है ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम ओम ह्रीम ओम और अब बहुत ध्यान के साथ अरिहंत मुद्रा के लिए आएंगे। ये इसमें हाथों को ऊपर ले जाना है। कानों से चिपका कर ऊपर ले जाना है। बिल्कुल चिपकाते हुए ले जाओ। हां स्ट्रेट खड़ा कर दो। इससे आलस्य दूर होता है। स्ूर्ति आती है। मानसिक शांति मिलती है। कषाय कम होती है। बिल्कुल मोटापा भी कम होता है इससे। ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणं। ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणं। ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणं। ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणम ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणं ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणंम ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणं ओम ह्रीम ओम नमो अरिहंताणम और अब बहुत ध्यान से धीरे-धीरे हाथों को नीचे ले आए और प्रमाद को दूर करना है और स्फूर्ति लाना है। मानसिक दुर्बलता कम करना है। एकाग्रता बढ़ाना है तो सिद्ध मुद्रा क्या करना है? हाथों को ले जाकर ऐसे खोलना है ऊपर। है ना? ऊपर ले जाओ। ऊपर ले जाओ बिल्कुल ऊपर चिपका के ओम ह्रीम ओम नमो सिंम ओम ओम नमो सिंम ओम ह्रीम ओम नमो सिद्धाणं ओम ह्रीम ओम नमो सिधाणं ओम ह्रीम ओम नमो सिधाणं ओम ह्रीम ओम नमो सिधाणं ओम ह्रीम ओम नमो सिधाणं ओम ह्रीम ओम नमो सिधाणं ओम ह्रीम ओम नमो सिधाणं ओम ओम नमो सिद्ध अब आएंगे बहुत ध्यान के साथ आचार्य मुद्रा में चलेंगे। यह जो मुद्रा है स्मरण शक्ति को बढ़ाती है। बच्चों के मन पढ़ाई में लगाने वाली मुद्राएं अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ती है। निर्भयता और आत्मविश्वास के लिए ओम ह्रीम ओम नमो आयरियाणम ओम ह्रीम ओम नमो आय अरियाणं ओम ह्रीम ओम नमो आयरियाणं ओम ह्रीम ओम नमो आय अरियाणं ओम ह्रीम ओम नमो आयरणम ओम ह्रीम ओम नमो आय अरियाणं ओम ह्रीम ओम नमो आयरणम ओम ह्रीम ओम नमो आय अरणम और अब बहुत ध्यान के साथ आएंगे और अब उपाध्याय परमेष्ठी की मुद्रा के लिए हम उपाध्याय मुद्रा में चलेंगे। ऐसा पान का आकार बनाकर छत में इस छेद में से आंख को खोलकर बिना पलक झपकाए देखना है। छत को देखना है। ऊपर छत को देखना है। ऐसे मिलाओ ना हाथ उंगलियां मिलाओ ऐसी। ऐसे मिलाओ और देखो उसमें से छेद देखना है। छेद में से ऊपर छत को देखना है। हां हार्मोन संतुलित गर्दन मजबूत। आंखें तीक्ष्ण होती है। पढ़ाई में तल्लीनता के लिए। ओम ह्रीम ओम नमो वजयाणं ओम ह्रीम ओम नमो वजायाणं ओम ह्रीम ओम नमो वजायाणं ओम ह्रीम ओम नमो वजाणं ओम ह्रीम ओम नमो वयाणं ओम ह्रीम ओम नमो वजाणं ओम ह्रीम ओम नमो वयाणं ओम ह्रीम ओम [गाना गाने की आवाज़] नमो वजायाणं ओम ह्रीम ओम नमो वयाणं ओम ह्रीम ओम नमो अध्यायाण धीरे धीरे हाथों को नीचे ले आए हाथों को नीचे ले आए और अब आप साधु परमेष्ठी की मुद्रा के लिए अपने आप को क्या करना है झुका कर ऐसे नीचे झुकना है और पूरे मनोभाव के साथ ये आपको समता और मैत्री भाव को बढ़ाने वाली ये तेज आपका बढ़ाएगी मुद्रा हां मेकअप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी अब बिना मेकअप के आप सुंदर लगेंगे ओम ओम ह्रीम ओम नमो लोए सब साउड ओम ओम नमो लोए सबसा साउं ओम ह्रीम ओम नमो लोए सब साउड ॐ ह्रीम ओम नमो लोए सब साहं ॐ ह्रीम ओम नमो लोए सब साउड ॐ [गाना गाने की आवाज़] ह्रीम ओम नमो लोए सब साहं ॐ ह्रीम ओम नमो लोए सब साहं ओम ह्रीम ओम नमो लोए सब साहं ओम ह्रीम ओम नमो लोए सब सावणं अब आएंगे बहुत ध्यान से ऊपर उठ जाए और अब आपको क्या करना है जो सबसे महत्वपूर्ण है जिससे हमको सबको को हीलिंग करना है। सबको निरोगी बनाना है। सबकी पीड़ा समाप्त करना है। ओम का उच्चारण क्या करना है? अ को कंठ पर सॉरी अ को नाभि पर यहां पर अपने मूलनायक भगवान जो आपने बनाए इतनी देर से उनको देखना है हृदय पर अ में सिद्ध भगवान अ में आचार्य जी उ में निर्यापक महाराज म में मुनिराज ठीक अ आ उ ऊ म और फिर हम जो अस्वस्थ लोग हैं जो बहुत सारे लोग हीलिंग के लिए बैठे हैं उन सब की हीलिंग अपन इसमें करते चलेंगे ठीक पूरे मनोभाव के साथ सब लोग आंखें बंद पांचो परमेष्ठी देखते हुए ओम का उच्चारण करेंगे करेंगे आ [कराहने की आवाज़] ओम आ ओम आ [बड़बड़ाने की आवाज़] ओम [नाक से की जाने वाली आवाज़] आ [बड़बड़ाने की आवाज़] आ ओम आ ओम आ ओम आ ओम आ आ ओम आ ओम आ ओम आ ओम आ आ ओम आ ओम आ [बड़बड़ाने की आवाज़] ओम [नाक से की जाने वाली आवाज़] आ ओम ओम [गहरी सांस लेने की आवाज़] आ ओम आ ओम और अब आपने ओम का उच्चारण किया आंखों को बंद रीड को सीधा और सामने एक ओम बना हुआ देखिए जितना बड़ा जितनी बड़ी हाइट में आप उतना बड़ा ओम देखिए लिखा हुआ देखिए बना हुआ देखिए ओम मैं जिस हाइट में बैठा हूं उतना बड़ा एक ओम मैं बना हुआ देख रहा हूं। ये ओम क्या करता है? कहते हैं इस ओम के माध्यम से शुद्ध ऊर्जा ग्रहण होगी हां अगर आप सच में इस ओम में पंच परमेष्ठी स्थापना कर देंगे उन किरणों को ग्रहण करेंगे जहां आपको तकलीफ हो। आपकी तकलीफ उन किरणों से दूर होगी क्योंकि आपने साक्षात पंच परमेष्ठी की ऊर्जा को उसमें समाहित किया है और उसकी ऊर्जा आपने ली है। सो सफेद किरणें आएगी और हमारे शरीर की बीमारियां दूर करेगी। अपन अपने जिस साइड पर अपन बैठे हैं उस साइड में बराबर ओम को हम विजुअलाइज कर रहे हैं। देख रहे हैं मेरे सामने बना हुआ वो ओम और अब उसको पंच परमेष्ठी की स्थापना करते एक बार सब लोग णमोकार मंत्र का उच्चारण करेंगे ताकि उसमें पंच परमेष्ठी स्थापना हो जाए। नमो अरिहंतम नमो सिंम नमो आयम नमो वयाम नमो [गाना गाने की आवाज़] लोए ससा और अब देखो उस ओम से ऊर्जा आ रही है। माने सफेद कलर की किरणें आ रही है। मेरे शरीर के अंदर आ रही है। बुलाओ आगज आगज आगज आगज किरणें आ रही है। और हम उन किरणों से स्वस्थ हो रहे हैं। निरोगी हो रहे हैं। अब भावना तो भाव अरे अब भावना भाव तो वो किरणें हमारे शरीर में प्रवेश कर रही है। हमें स्वस्थ और निरोगी बना रही है। और अब अपने चक्रों को एक्टिवेट करेंगे हम। हां। तो क्या करना है? सबसे पहले अपने दोनों बहुओं के मध्य में आए। ज्ञान केंद्र है। इस ज्ञान केंद्र को हमें एक्टिवेट करना है। एक सफेद कलर कास्टली कमल देखें आप। दोनों बोहो के मध्य में आठ पंखुड़ियों का सफेद कलर का कमल है। अब मैं यहां से ऊर्जा भेज रहा हूं। आपका पूरा ध्यान दोनों बोहों के मध्य में रखना। अपने उस आज्ञा चक्र को उस ज्ञान केंद्र को एक्टिवेट करना। नमो अरिहंत हां दोनों बहुओं के मध्य में इस स्थान पर आप अपने ध्यान को ले गए। चक्र एक्टिवेट हुआ जिसको देख पाया मैं उतने लोगों को मैं कर पाया हूं। अब सिर के ऊपर एक लाल कलर का अष्ट कमल देखें। देखें विजुअलाइज करें। यह दर्शन केंद्र है सहस्त्र चक्र इस पर मैं ऊर्जा को दे रहा हूं। आप पूरा ध्यान वही रखना। नमो सिद्ध आपको उच्चारण नहीं करना है। आपको तो सिर्फ उन स्थानों पर ध्यान देना है। फिर आएंगे अब कंठ पर आए। पूरे ध्यान से कंठ पीले कलर का कमल देखें आप। बहुत ध्यान से देखें आप यह बहुत सुंदर सुंदर कम ये जैसे आप पीला कलर देखेंगे ये विशुद्ध केंद्र को जागृत करेगा कंठ पर तेज ओज बढ़ाता है व्यक्तित्व प्रभावशाली बनाता है इच्छा शक्ति प्रबल होती है इससे नमो [गाना गाने की आवाज़] आया हरियाण और अब बहुत ध्यान से आए नहीं आपको उच्चारण नहीं करना है बिल्कुल नहीं करना है हर ह्रदय पर आया और ह्रदय पर आनंद केंद्र बनाया देखें अनाथ चक्र बोलते हैं इसको हरे कलर का कमल देखें क्रोध कम एकाग्रता बढ़ेगी आनंद की अनुभूति होगी हृदय पर नमो उयाण और आपने हृदय पर किया और अब आए आप नाभि पर आ जाए बहुत ध्यान से आए सहिष्णुता बढ़ानी क्षमता बढ़ानी प्रतिरोधक शक्ति बढ़ानी है तो नाभि पर काले कलर का कमल बहुत ध्यान से देखें पूरी मनोभाव से देखें काले कलर का कमल नमो लोए सवा साम और आपने देखा बहुत ध्यान से काले कलर के कमल को नाभि पर देखा और अब है ना पांचो चक्र को मैंने एक्टिवेट किया अब आपको एक्टिवेट करना है अब आपकी बारी है आपको करना है कैसे करना है आपको मैं यहां से न बोलूंगा आपको अपने ललाट पर सफेद चौक से न लिखना है श्वास लेना है छोड़ना मुंह बोलूंगा वहां पर सफेद चौक से सफेद रंग से मोह लिखना है तो ऐसे सास स्वास श्वास में ललाट पर नमोता आपको लिखना है फिर बाद में पांच शस में लाल कलर सिर के ऊपर इनहीं स्थानों पर लिखना है ये आप स्वास लेना छोड़ना लिखना इससे आपके चक्र एक्टिवेट होंगे तो करते हैं हम यहां से उच्चारण करेंगे आपको इन वर्णों को लिखना है स्वास एक बार में शस सस लेना छोड़ना है हम ना बोलेंगे लेना और छोड़ना है कर रहे हैं यहां से आंखें बंद लिखना प्रारंभ करें अपने लाड पर आप शस के साथ ना मो आ री ह और अब सिर के ऊपर लाल वर्ण से पांच शसो शस में लिखना है आपको सिर के ऊपर से धम देखिए बहुत ध्यान से ऊपर देखिए प्यूटरी पीनल दोनों को नियंत्रित रेड ब्लड सेल्स से बढ़ते हैं। आलस प्रमास समाप्त होता है। अब पूरे ध्यान के साथ आप अपने कंठ पर लिखें तेज ओज की वृद्धि निश्चित विशुद्ध चक्र थायराइड सब ठीक होता है। से कंठ पर रा मो या री याम देखो बहुत ध्यान से कंठ पर नम राम को लिखा हुआ देखो आप लिख रहे हैं आप अब आएंगे हम और हृदय पर आए और एकाग्रता को समाधि समता को लाने के लिए आप आ जाए कहां पर कंठ पर सॉरी कहां पर हृदय पर और हृदय पर हरे रंग से लिखेंगे आप मोए अपनी नाभि पर आए आप बहुत ध्यान से काले वर्ण से लिखेंगे ये सकारात्मक वाला स्थान है इसको बहुत ध्यान से काले वर्ण से लिखिए आप कितनी नौ सासो स्वास मो [गाना गाने की आवाज़] सा और आपने नाभि पर नम को लिख लिया और अब पूरे मनोभाव के साथ पंचरंगी सुरक्षा कवच हम तैयार करेंगे और नहीं पहले ओरा अपने चारों तरफ का ओरा हमें क्लियर करना है तो णमोकार मंत्र को यहां से हम उच्चारित करेंगे और निश्चित इस णमोकार मंत्र के उच्चारण के साथ हमारे चारों तरफ की ऊर्जा हमारे चारों का होरा पवित्र होगा। नमो अरिहंतम नमो सिंम नमो आयम नमो नमो लोए सवसाहुम नमो अरिहताम नमो सिंम नमो अरणम नमो अजयम नमो सब साम देखिए बहुत ध्यान से देखिए मेरे चारों तरफ का हो रहा है इसको मैं क्लियर कर रहा हूं मैं शब्द बोल रहा हूं क्या बोल रहा हूं शुद्धि शुद्धि शुद्धि और ये पूरे चारों तरफ का हमारा आसपास का जितना भी आभामंडल था पवित्र हो चुका है और अब सबसे महत्वपूर्ण बारी पंच रंगी सुरक्षा कवच हां अपने चारों तरफ एक सफेद बॉर्डर बनाना है फिर उसके ऊपर लाल फिर पीली फिर हरी और फिर काली बॉर्डर तैयार करना है। है ना? एक एक इंच की बॉर्डर बनेगी। यहां से मैं उच्चारण करूंगा और आपको वो बॉर्डर बनाते जाना है। तो सफेद कलर की बॉर्डर बनेगी है ना? आंखों को बंद नमो अरिहताणं नमो सिंम नमो अरिहताणं नमो अरिहताणं सफेद बॉर्डर नमो अरिहताणं नमो अरिहताणं [गाना गाने की आवाज़] आप बनाओ सफेद बॉर्डर चारों तरफ नमो अरिहताणं नमो अरिहताणं नमो अरिहताणं नमो अरिहताणं नमो अरिहताणं नमो अरिहंत [गाना गाने की आवाज़] अब लाल कलर की बॉर्डर उसके ऊपर बनेगी ध्यान से बनाना नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] नमो सिंम नमो सिंम नमो सिम नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] नमो सिंम नमो सिधाणम नमो सिंम नमो सिंम नमो सिंम [गाना गाने की आवाज़] अब पीले कलर की बनेगी बहुत ध्यान से पीले कलर की बॉर्डर को देखें अब सफेद हो गई लाल हो गई उसके ऊपर पीए नमो आरणम नमो आय रीणम नमो आरणम नमो आय रीयाणं [गाना गाने की आवाज़] नमो आरणम नमो आय रीयाणं नमो आरणम नमो आय रीयाणं नमो आयणं बहुत ध्यान से पीले कलर की हो गई अब चारों तरफ सफेद लाल पीले के ऊपर हरी कलर की नमो नमो वजाम नमो वजाम नमो वजाम नमो वजाम नमोणम नमो [गाना गाने की आवाज़] नमो वजायम और अब देखिए बहुत ध्यान से हरी कलर की बन गई अब उसके चारों तरफ सफेद लाल पीली हरी के ऊपर काले कलर की नमो लोए सब सां नमो लोए सबसा साहहुम [गाना गाने की आवाज़] नमो लोए सब साहहुम नमो लोए सब साहहुम नमो लोए सब साहहुंम [गाना गाने की आवाज़] नमो लोए सब साहहुंम नमो लोए सब साहहुं नमो लोए सब साहहुंम नमो लोए सब साहहुंम नमो लोए सब साहहुंम और अब बहुत ध्यान के साथ हम आ रहे हैं बहुत सुंदर सुंदर प्रक्रिया की ओर आंखों को बंद रीड को सीधा रखें और अब हम कम से कम एक एक मिनट तक इन चक्रों को एक्टिवेट करेंगे ध्यान करेंगे हम हां क्या करें अपने ललाट पर जाए और सफेद कलर का एक बहुत सुंदर सा मंत्र लिखना है आपको ललाट पर शांति देखो दोनों बहुओं के ऊपर सफेद वर्ण से शांति लिखो अरे आंखों को बंद करो ललाट पर शांति लिखो और विजुअलाइज करो मैं शांत आत्मा हूं। देखो मैं शांति के रास्ते खोज रहा हूं। मैं शांति के स्थान पर पहुंच रहा हूं। लिखो ध्यान से बहुत ध्यान से। विजुअलाइज करो। शांति को अनुभूत करो। पकड़ने का प्रयास करो। देखने का प्रयास करो। मैं शांत आत्मा हूं। मैं शांत आत्मा हूं। मैं शांत आत्मा हूं। मैं शांत आत्मा हूं। आप शांति का अनुभव कर रहे हैं। शांति को देख रहे हैं और अब पूरे मनभाव के साथ आप आए सिर के ऊपर आए और सिर के ऊपर आप लाल वर्ण लाल अक्षर लाल कलर से लिखे आंखों को बंद करें अभी और लिखें शुद्धि इससे अपने पापों का जो भी हमने गलत किया है उसका प्रक्षण करें। मैंने जो गलत किया है मैं उसको विचार कर रहा हूं और शुद्ध कर रहा हूं। लाल वर्ण से शुद्धि सिर के ऊपर ये शुद्धि क्या करा रही है? मुझे पवित्र बना रही है। मेरे पाप का प्रक्षण कर रही है। लाल कलर शुद्धि लिखो देखो प्रयास करो। लाल शुद्धि लिखने का निकालो अपने आप कहां पर? शरीर के ऊपर शुद्धि। अब कंठ पर आए आप पीला कलर पीले वर्ण पीले रंग से लिखें आप बहुत ध्यान से सहन शक्ति लिखो और अपने आप को विजुअलाइज करो मैं सहनशील आत्मा हूं मैं छोटी मोटी बात में घबराने वाली आत्मा नहीं सब बातों को बहुत सहज भाव से सहन करने वाली सहन शक्ति और अब पूरे मनोभाव के साथ हरे कलर से लिखो आप अपने हृदय कमल पर लिखो तो सही लिखो तो सही क्या लिखना है संतोष हां मैं संतोषी आत्मा हूं मैं आकुल व्याकुल रहने वाली आत्मा नहीं जो मिल जाए अपने आप को जीवन जीने वाली वाली संतोषी आत्मा हरे कलर से हृदय पर संतोष और अपनी अब नाभि पर आएं बहुत ध्यान के साथ नाभि पर काला वर्ण काले रंग से आप सकारात्मकता लिखें लिखो प्रयास करो अपनी नाभि पर सकारात्मकता काले वर्ण काले रंग से देखो आप और अब ये मानो मैं बहुत अच्छी आत्मा हूं। हां हर एक चीज को पॉजिटिव में लेने वाली आत्मा हूं। मेरे जीवन में ना नहीं है। हमेशा हां ही है। हर क्षण हर पल में हां बोलने वाली आत्मा हूं। सकारात्मक आत्मा बहुत ध्यान से देख आप अपने नाभि कमल पर सकारात्मकता। और अब एक दो मिनट और दिए आपको दिए आप अपने हिसाब से जो आपको अच्छा लगता उस मंत्र पर ज्यादा ध्यान दें शुद्धि पर शांति पर सहन शक्ति पर विजुलाइज करें उसको फील करें उसको बार-बार उच्चारित करें उसको उसमें डूब जाए उसमें लग जाए एक दो मिनट बस दिया आपको मैंने और अब पूरे मनोभाव से हाथों को बाहर लाएंगे। हाथों को बाहर लाएं। हां थक गए मैं मान रहा हूं। हाथों को बाहर ले आएं। ठीक? और ऊर्जा को चेक करें। मेरी आंखों को बंद करें। तुरंत जल्दी से आंखों को बंद करें। आंखें बंद और अपनी हथेली से ऊर्जा को चेक करें आप कि मेरी हथेली से कुछ गारीपन कुछ गर्माहट निकल रही है। कुछ शक्ति कुछ पावर बाहर निकल रही है। फील करें इस ऊर्जा को इस शक्ति को इस पावर को पूरे मनोभाव से इस शक्ति को इस ऊर्जा को इस पावर को बाहर भेजने का प्रयास करें। ये ऊर्जा ये शक्ति ये पावर मेरी जा रही है। और मैं इस ऊर्जा और शक्ति को पूरे मनोभाव से बाहर जो अपने अपने परिचित है उन तक भेज रहा हूं। इस ऊर्जा उन शक्ति को इस पावर को उन तक प्रेषित कर रहा हूं ताकि उनकी सब पीड़ाएं सब रोग सब व्याधियां सब तकलीफ सब कष्ट दूर हो जाए पूरे मन भाव से भेज रहा हूं ये जा रही है ऊर्जा ये शक्ति जा रही है पावर जा रही है स्वस्थ हो रहे वो निरोगी हो रहे हैं उनका चेहरा देख उनकी पीड़ाएं तकलीफ कष्ट जीवन की समस्याएं समाप्त उनके जीवन में सुख शांति प्रेम महाराज इस पूरे परिसर में जितने लोग बैठे हैं वो और जो लोग ऑनलाइन ध्यान अटेंड कर रहे हैं वो ये मेरी ऊर्जा जा रही है सबकी पीड़ाएं समाप्त सबके रोग समाप्त, सबकी व्याधियां समाप्त, सबकी चिंताएं समाप्त, सबके जीवन की आकुलताएं, व्याकुलताएं, समस्याएं, बाधाएं सब समाप्त हो रही है। सब सुखी हो रहे हैं। सबके जीवन में शांति आ रही है। प्रेम आ रहा है, वात्सल्य आ रहा है, स्नेह आता चला जा रहा है। निश्चय सबका जीवन शांत बनता जा रहा है। और पूरे मनोभाव के साथ जहां आपको लग रहा है ये मेरा अवग है। ऊपर से लेकर नीचे तक अभावना मैं स्वस्थ हो रहा हूं। मैं निरोगी हो रहा हूं। मेरी पूरी पीड़ाएं, मेरे पूरे कष्ट, मेरी पूरी व्याधियां, मेरे शरीर की हर तकलीफ दूर होते चली जा रही है। मैं अपने आप को स्वस्थ फील कर रहा हूं, महसूस कर रहा हूं। बिल्कुल अपने आप को खुश और शांति में महसूस कर रहा हूं। चलिए ये कुछ पल्ले पड़ा। हालांकि यह ध्यान जो है एक एक स्टेप को बहुत अच्छे से समझाकर फोटोस दिखाकर क्लियर करके हम कराते हैं और डायरेक्ट आपको करा दिया। भविष्य में जब इसको कराएंगे जब जिनवाणी पर चलेगा तो डिटेल में पहले इसको तीन-चार दिन आपको समझाएंगे। ठीक? लेकिन आज दीदी ने तो 42 दिन का कोर्स किया है। इसलिए उनके कहने से करा दिया। है ना? बहुत पावरफुल ध्यान है। बहुत ही चमत्कारी ध्यान है। मतलब चक्र घूमते ही घुमाते बीमारियां दूर होती है। हाथ हिलाते हिलाते ही निश्चित रूप से आप स्वस्थ करने की ऊर्जा अपने अंदर ले आएंगे। इसको णमोकार मंत्र हीलिंग ध्यान बोलते हैं। उज्जवला जी ने इसको कंप्लीट किया है। सैकड़ों प्रकार के अध्ययन पुस्तकों के अध्ययन के बाद और बहुत सारे हीलिंग कोर्स करने के बाद और कम से कम इन्होंने पीछे 2025 लोग जो ऐसे ऐसे रोग वाले हैं जो इससे ठीक हुए उनका स्टेटमेंट फोटो फोन नंबर पता सहित दिया है पूरा इस पुस्तक में आपको YouTube वगैरह सब जगह नेट पर भी डली मिल जाएगी तो इस पर आप चेक करें बहुत पावरफुल चीज है ये बस थोड़ा सा मैंने उसको अपने हिसाब से थोड़ा बहुत चेंज उसमें किया लेकिन जिसने भी इसको किया है जो एक बार करता है अभी पहली बार में आपको इतना समझ में नहीं आया होगा जब दो चार बार कर लोगे तो आप इसके आदि हो जाओगे फिर आपको इससे बड़ा आनंद लगेगा ठीक चलिए तो ये हो गया और अब हां नियम नियम आपको दे देते हैं कल का क्या नियम है आज का था बेसन का त्याग हा आज हमारा आटा ही लेने का नियम था गेहूं मतलब और हमसे बेसन की चीज को बोला गया कि यह गेहूं है। मैंने कहा सरासर झूठ ऊपर वाला देख रहा है फिर भी डर नहीं रहा कोई। चलिए फिर उसके बाद क्या है? चतारी दंडक पढ़े। है ना? कल का नियम क्या है? क्या आएगा? चतारी दंडक का पाठ को आपको पढ़ना