अंतर्मुखी यात्रा

05/08/2026 ज्ञान कल्याणक मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [

05/08/2026 ज्ञान कल्याणक मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [

01:00:00 प्रारंभिक किसी भी समय Guided Meditation
ध्यान प्रारंभ करने से पहले

कुछ क्षण स्वयं के लिए

शांत स्थान चुनें, मोबाइल को साइलेंट करें और सहज अवस्था में बैठें।

इस ध्यान के बारे में

05/08/2026 ज्ञान कल्याणक मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [

ध्यान निर्देश

आराम से बैठ जाएँ।
अपनी रीढ़ को सहज रूप से सीधा रखें और धीरे से आँखें बंद कर लें।

अब अपना ध्यान अपनी श्वास पर लेकर आएँ।

धीरे-धीरे गहरी साँस लें…
और आराम से साँस छोड़ें…

एक बार फिर…
गहरी साँस अंदर लें…
और धीरे-धीरे बाहर छोड़ें…

ध्यान के लाभ

05/08/2026 ज्ञान कल्याणक मुनि श्री 108 दुर्लभ सागर जी महाराज जी [

ध्यान Transcript

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कोई ना फल देता कुछ भी पर देता है मैं विचार तर स्थिर हो छोड़ प्रमाद बुद्धि निर्मल सत्य शिवम सुंदर है अमित गति देव महान स्वास निज में अनुभव करते पाते निर्मल पद [गाना गाने की आवाज़] इन पदों से जो कोई परमा को नाते सा को पा भव ददी तर जाते चलिए कोई बात नहीं दो मिनट अपन एक्स्ट्रा ले लेंगे आज चलते हैं पूरे मनोभाव के साथ मंगलमय ध्यान की प्रक्रिया को अपन लोग मिलकर प्रारंभ करते हैं और जैसा कि आपको पता ही है ज्ञान कल्याणक का ध्यान अपन लोग सीख रहे है बहुत अच्छे से मनोभाव से इस ज्ञान कल्याणक के ध्यान को सीखेंगे सबसे पहले तो हम फाइव स्टेप करेंगे। ठीक है ना? पहली स्टेप कौन सी मैं स्क्रीन पर आपको बता रहा हूं। जो लोग नए देख लें अपनी स्वासों पर ध्यान देना है। प्रत्येक ऑर्ग्स पर मेरी स्वास जा रही है। आ रही है। इसे हमें बहुत ध्यान से देखना है। और इससे पूरे शरीर को रिलैक्स करना है। दूसरे नंबर पर सोहम। सो में श्वास लेना है। हम में श्वास छोड़ना है। सो का अर्थ होता है वह मैं हूं। मैं कौन हूं? मैं आत्मा हूं। मैं शरीर भी नहीं हूं। मैं मन भी नहीं हूं। मैं शरीर भी नहीं हूं। में मन भी नहीं हो। यह दूसरी स्टेप हमारी बहुत ध्यान से थर्ड तीसरी स्टेप ओ को कंठ से नहीं तीसरी स्टेप हां ठीक अब तीसरी स्टेप ओ को कंठ से और मां को नाक से ठीक है ना इसमें हम सब लोगों को हीलिंग करते हैं सभी लोगों के लिए नमो शिव शिवण नमो शिव शिवण ओम नमो शणम नमो शवण ओम नमो शवदाण ओम नमो शण ओम नमो शव नमो शण नमो शण नमो शण ओम नमो नमो शव शवण ओम नमो शण ओम नमो शण नमो शण नमो श ओम नमो शव शान नमो शव शान ओम नमो शव शवदाण ओम नमो शिव शिवण ओम नमो शिवण ओम नमो शिव शिवण नमो शिवण नमो शो नमो शण आएंगे और अब बहुत ध्यान के बहुत ध्यान के साथ आएंगे और अब ललाट पर आए बहुत ध्यान से ललाट पर आएंगे ललाट पर देखिए आप बहुत ध्यान से देखिए सफेद चौक सफेद वर्ण सफेद रंग सफेद कलर सफेद रंगोली से मैं अपने बोहों पर लिख रहा नमो अरिहंता देखिए बहुत ध्यान से देख नमो अरहता को ललाट पर अब ऑब्जरवेशन करें स्क्रीन पर देख ले नहीं बन रहा हो तो और अब लाल वर्ण से लिखें लाल स्केच लाल रंग से लिखें नमो सिद्धाण देखो बहुत ध्यान से अपने ललाट पर नमो सिद्धाणु लाल स्केच लाल रंग से लाल वर्ण से आप लालाट पर नमो सिद्धाण देख रहे हैं पीला वर्ण पीले स्केच से देख रहे हैं आप पीला रंग पीली रंगोली से लिखा हुआ देखिए लालाट पर न मोर यण बहुत ध्यान से देखिए आप नमण को पीले वर्ण से लार पे देख रहे हैं। हरा स्केच हरा वर्ण हरे रंग से देख रहे हैं आप नमो उ वयाणं वो ध्यान से लिखें देखिए मैं अपने आप को अपने ललाट पर स्थिर कर रहा हूं। नमो चरणम से देख रहा हूं हर कल्प से काले वर्ण से लिखें काला स्कीज वही ललाट पर नमो लोए सव साहूम ललाट पर लो फिर पंच परमेष्ठी में ओम बहुत ध्यान से देखना है आपको पांचों स्थानों पर [नाक से की जाने वाली आवाज़] नाभि पर मूलनायक हृदय पर सिद्ध भगवान कंठ पर आचार्य श्री जी दोनों भो निरापक मुनिराज आ आ ओम आ ॐ और अब बहुत ध्यान से हम ज्ञान कल्याणक की प्रक्रिया को प्रारंभ करने के पहले एक बार आगे का मंत्र देख लें। और कोई एक जना जिन्हें बताना है वो एक जना कोई भी आ जाए और बताना चाहता है बहन बताना चाहती है सिटी वाली आ जाओ आता है पूरा आता है आ जाओ चलो ठीक हां ज्ञान कल्याणक के पूरे बीजा अक्षर बहन बता रही है हां दीपक भाई थोड़ा सा स्क्रीन पर देख ले हां देखें माइक दे दे भैया पहले से माइक रखो करो ना जल्दी जल्दी करो बहन है ना हां देखें आप बहुत उसको नहीं दिखाओ स्किन को नहीं दिखाऊंगा हां ठीक ठीक ठीक नमोस्तु महाराज श्रीम ओम रम जठरे नाभि पर पेट से संबंधित सभी बीमारियां दूर करने के लिए ओम राम ललाटे ललाट पर एकाग्रता के लिए ओम ह्रीम बाम करणे बाएं कान पर नकारात्मकता से दूर ओम रूम दक्षिण करण दाएं कान पर लेक्चर आदि सुनने के लिए ओम ओम ओम रोम सिरा पश्चिमे सिर जहां बाल खत्म होते हैं उधर एक पाठी बनने के लिए ओम रहा मस्तको परी मस्तक की टोंक पर जहां उससे उससे सभी बीमारियां दूर होती हैं। ओम क्षमाम नेत्रयो दोनों आंखों पर इससे चंचलता दूर होती है। ओम छमी मुख्य दोनों होठों पर इससे इससे वाणी में मिठास आती है। ओम छुमूम कंठे कंठ पर इससे कंठ पर इससे समाधि मरण होता है। अकाल मरण नहीं होता। ओम क्षमो ओम क्षमोम हृदय हृदय पर इससे हृदय पर इससे सबको अपना बनाने के लिए ओम सहा ओम क्षमः वायु दोनों भुजाओं पर इससे शक्तिशाली बनने के लिए ओम क्रोम उदरे पेट पर इससे पेट पर इससे इससे भूख प्यास समाप्त करने के लिए ओम ओम ही ओम ह्रीम कठ्याम कमर की दोनों ओर इससे कमर की दोनों ओर इससे इससे कमर के रोग दूर होते हैं। ओम ब्लूम जंग दोनों दोनों जगहों पर इससे लक्ष्य प्राप्ति करने के लिए ओम ओम छूम पादो दोनों पैरों के पंजों पर इससे इससे जीवों की हिंसा ना हो। ओम चा ओम सहा पादो दोनों हाथों की ओम ओम दोनों हाथों की हथेलियों पर इससे इससे जिससे कोई कार्य गलत ना हो नमोस्तु महाराज बहुत अच्छा भाई आ जाओ अपने मंगावली वाले आ जाओ एक जन जल्दी से फटाफट आ जाओ मंगाली वालों से कह देंगे वो गिफ्ट दे देंगे ठीक वही बर्तन हां है वो रखे बहुत सुंदर बहुत अच्छे से बहन ने बहुत अच्छा सुनाया फलादेश भी पिछली बार के याद होंगे पिछली बार के फलादेश भी बहन ने पूरे बहुत सुंदर तरीके से बताएं। अब उनहीं बीजाक्षर को एक बार फिर से मैं आपके बीच में रख रहा हूं ताकि क्या है आप और अच्छे से कर ले। अभी उस समय इतने अच्छे से मैंने उनके फलादेश नहीं बताए थे। उन फलादेशों को बता रहा हूं। ठीक? चलिए चलते हैं फलादेश पर। बहुत सुंदर। फलादेश पर आते हैं अपन आए स्क्रीन पर और अब बहुत ध्यान से देखें आप। ओम ये हरम अपने को नाभि पर लिखना है। ये हरम हमने नाभि पर लिखा। ओम ब्रम जठरे इससे क्या होता है? पेट से संबंधित सब प्रकार की बीमारियां दूर होती है। अरे इतनी जल्दी नहीं कर भैया। बहुत ध्यान से हरम को आपने देखा और ये हरम क्या कर रहा है? ये हरम पूरी हमारी शारीरिक जो लोग पेट से संबंधित बीमारी से परेशान है। उनके काम का है हरम। ओम रम जठ। फिर आएंगे हम कहां पर? हराम। कहां? दोनों बहुओं के मध्य में। हराम पर आए। यह हम में आ की मात्रा रेफ अनुसार राम सेकंड नंबर राम को देखें और यह राम क्या कर देगा बच्चों के काम का एकाग्रता फोकस के लिए कल इसके विषय में बहुत अच्छे से हमने बता दिया राम के विषय में बता दिया ओम राम ललाटे है ना और इस ओम राम ललाटे को आप देखें बहुत ध्यान से ओम राम ललाटे देख रहे फिर आप आ जाए बाएं कान पे जाए छोड़ो आप बाएं कान पर आए और बाएं कान पर ह्रीम थर्ड नंबर का ओम ह्रीम वाम काम करने ठीक वो थोड़ा सा दिख नहीं रहा है स्वर्णमय अक्षर में देखो ह तो लिखा है ना वो तो दिख रहा है आपको ऐसे ह व है वो पीले कलर में है अभी पी लाल कलर वाले में तो दिख रहा है स्पष्ट दिख रहा है ऐसा ह्रीम सिर्फ वहां लिखना है कहां बाएं कान पर ओम ह्रीम वाम करण नकारात्मकता या निंदा नहीं सुनना उसके लिए फिर कल मैंने आपको बताया था बहुत सुंदर सा बीजाक्षर हुम दाहिने कान पर हुम बीजाक्षर को दाहिने कान पर स्वर्णमय चमकता हमने कल देखा था पूरा ध्यान से और उसका फलादेश क्या था लेक्चर सुनने के पहले है ना देखो ओम रूम है ना वो चमक रहा है तो उसको नहीं देखो वो लाल स्केल में देखो हम में बड़ा ऊ की मात्रा रेफ अनुस्वार हु है ना लिखेंगे हुम और ओम रूम दक्षण करने प्रवचन सुनना हो ऑनलाइन पढ़ना हो या कोई कठिन विषय आप सुन रहे हो उसके पहले ओम भ्रूम दक्षिण करने इसको हमने बहुत ध्यान से देखा और तब आज बारी आती है काय की तो आज आप लोगों के बीच में रख रहा हूं मैं अगला बीजाक्षर हौ ये देखिए बहुत ध्यान से देखें बहुत अच्छे से दिख रहा है ये बीजा बहुत सुंदर दिख रहा है हरौ इसका उच्चारण सही होना चाहिए हरौ हरौम ये जो बीजाक्षर है सिरः पस सिरः पस चिमे सिर पस चिमे सिर पस चिमे तो भैया धीरे करो सिरा पश्चिमे का तात्पर्य क्या आएगा ये सच में उसी को चलने दो भैया ये सच में बहुत महत्वपूर्ण बीजाक्षर है ओम रोम सिरा पश्चिम इसको बहुत अच्छे से स्टार्ट कर लो आप देख लो कैसे हमें देखना है यहां हमें देखना है सिर के विषय में देखना है रोम बीजाक्षर को लिखा हुआ देखना है रोम ये जो रोम बीजाक्षर है इस बीजाक्षर के माध्यम से क्या होगा तो पहले भी बताया था फिर पुनः बता रहा हूं कि यह बीजाक्षर इतना सुंदर बीजाक्षर है कि इसी बीजाक्षर के माध्यम से प्रभु को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है। केवल ज्ञान की प्राप्ति ओम रोम सिरा पश्चिमे के माध्यम से यहां पर हम जब ओम रोम सि पश्चिमे पढ़ते हैं तो इसका जो फलादेश आगम ग्रंथों में लिखा है क्या भगवान को तो इस बीजाक्षर से केवल ज्ञान की प्राप्ति हो गई जैसे ही बीजाक्षर यहां लिखा जाता है तो इसके माध्यम से केवल ज्ञान की प्राप्ति हो गई पर उसके फलादेश में प्रतिष्ठा ग्रंथ में आया है कि जो लोग इस बीजा अक्षर का ध्यान करते हैं, मेडिटेशन करते हैं। इस बाबा इस बीजाक्षर को बार-बार उच्चारित करते हैं। वो एक पाठी बन जाते हैं। एक पाठी मतलब केवल ज्ञान तो हमें नहीं हो सकता। केवल जानावर्णी कर्म का तीव्र उदय सर्वघाती उदय वो नहीं हो सकता। लेकिन इसको अगर हमने सच में सिद्ध कर लिया तो हम पढ़ेंगे और याद होगा। क्या होगा? पढ़ना मतलब क्या होता है? एक बार जैसे मैंने कुछ पढ़ा अब उसको जीवन के अंत समय तक आप भूलोगे नहीं। इतनी अजर अमर शाश्वत बुद्धि आपकी हो जाएगी। तो मैं तो ये कहता हूं कि हर विद्यालय में हर एक कक्षा में इस बीजाक्षर की प्रार्थना होनी चाहिए। है ना? आपको यह बीजाक्षर बताना चाहिए और आंखों को बंद कराकर इसका उच्चारण कराना चाहिए। रोम लिखवाना चाहिए और ओम रोम सिर पश्चिमे ये बार-बार उच्चारण करना चाहिए उच्चारण करना चाहिए जो छोटे बच्चे हैं उनको आप ओम रोम सिर पश्चिमे को एक छोटी सी बालिका थी एलोरा में उसने पूरे मंत्र याद किए थे और ओम रोम सिर पश्चिम को बहुत अच्छे से उसने विजुअलाइज करके बताया था तो मेरा यही भाव है कि आप पूरे मनोभाव से इस ओम रोम सिर पश्चिमे बीजाक्षर का अनुष्ठान करें बुद्धि अंत समय तक आपकी प्रबल रहेगी। इससे एक बार पढ़ने में याद होने लग जाएगा। जिसको सिद्ध हो गया वो एक बार पढ़ेगा और एक बार पढ़ने में आपको निश्चित रूप से वो वैसा का वैसा खांका आपका आपके दिमाग पर फिट हो जाएगा। और फिर ये जो ओम रोम सिरपस में बार-बार जब भी आप पढ़ने बैठो तब भी आपके काम का है। जब आप एग्जाम देने जाओ तब भी आपका काम का है। जब आप कहीं अपनी कुछ प्रस्तुति देना है तब भी आपका काम का है। उनके लिए भी और जो लोग निश्चित है कि बहुत सारे ऐसे भी छप्सम होते हैं जो मंद बुद्धि है तो मंद बुद्धि बच्चों के लिए भी काम का है। जो लोग पढ़ने में कमजोर है उन बच्चों के भी काम का है। क्योंकि निश्चित बुद्धि कम होती है तो पुण्य इससे बढ़ता है और प्रबल पुण्य बढ़ता है तो यह और तीसरी और सबसे बड़ी बात कहते हैं यहां पर छोटा दिमाग होता है। ठीक। यहां जो होता है छोटा यहां नहीं मारते। यहां नहीं मारते। अगर यहां मार देते हैं तेजी से यहां ज्यादा देर से तो क्या होता है? वह होता है। तो सबसे मर्म बिंदु यहां पर होते हैं। सिर के पीछे इस स्थान पर सबसे मर्म बिंदु होते हैं। है ना? तो इस मर्म बिंदु को अगर आपने एक्टिवेट कर लिया, सबसे नरम हिस्से को अगर आपने एक्टिवेट कर लिया तो आप निश्चित मान के चलना आपका आपकी शरीर की सजगता बढ़ेगी। यहां मेडिटेशन करने से विज्ञान के अनुसार से आयुर्वेद के अनुसार से डॉक्टर की भाषा के अनुसार से एक्यू प्रेशर एक्यूपर के हिसाब से यह मर्म बिंदु कहलाता है और मर्म इसको चेती बोलते हैं। मर्म बिंदु कहलाता है। इस मर्म बिंदु को अगर आपने एक्टिव कर लिया तो होगा क्या? ये जैसे एक्टिव होगा तो आप फास्ट हो जाओगे। क्विक हो जाओगे। आपका जो कहना चाहिए कि ढीलापन है वो कम हो जाएगा। आप हर चीज को बहुत जल्दी कैच करने की कैचिंग पावर आपकी बढ़ जाएगी। तो जो मंदबुद्धि बच्चे हैं उन मंदबुद्धि बच्चों के लिए भी ये काम का है। जिनका दिमाग कम चलता है उनके भी काम का है। तो इस बीजाक्षर को वो करेंगे तो उनकी बुद्धि प्रबल और पावरफुल बनेगी। इस बीजाक्षर से कैचिंग पावर उनकी तेज बनेगी। बहुत सारे माताएं आती है मुझसे कहती है तो कि हमारा बच्चा बहुत अह पढ़ने लिखने में कैच करने में फास्ट नहीं है। तो इससे कैचिंग पावर बढ़ेगी। पहला फायदा दूसरा फायदा एक पाठी आप बन जाओगे फास्ट एक्टिविटीज आपकी बढ़ते चले जाएगी क्योंकि यह शरीर का सबसे नरम हिस्सा है। इस नरम हिस्से में ऐसी ऐसी माम जो मुलायम मुलायम नसे हैं इनको आपने एक्टिवेट कर लिया तो पूरा शरीर आपका एक्टिवेट हो जाएगा। बहुत ध्यान से ओम रोम सिर पश्चिमे तो बच्चों के काम का आप इसको महामंत्र बना ले इसकी रोज माला फेरे ठीक रोज इसका अनुष्ठान करें इसका अनुष्ठान आप रोज करेंगे तो आपको सिद्ध हो जाएगा और सिद्ध होने के बाद आपको और हम इसका सबसे बड़ा फायदा बताएं कि यह बीजाक्षर इतना पावरफुल है कि मान लीजिए आपको कुछ नहीं भी बन रहा है और आप कुछ नहीं करें आप ओम ब्रम सिर्फ पश्चिम में करेंगे तो अपने आप आपको बनने लगेगा। अपने आप आपके आपका दिमाग चलने लगेगा। अपने आप आपको प्रश्न का उत्तर आ जाएगा और कहां से आप बोल दोगे आपको पता ही नहीं चलेगा। और आप निश्चित रूप से ओम रोम सिरपस के माध्यम से आप अपनी जो भी सामने आप डिफिट जो भी आप जैसे डिबेट कर रहे हो वो डिबेट में आप विजय प्राप्त करोगे। ऐसा पावरफुल बहुत शानदार ये ओमो सिर पश्चिमे बीजा अक्षर है सभी लोग बच्चे लोग नियम ले लो कि हम कम से कम ये इस स्थान पर कितनी बार पढ़ेंगे बोलो कितनी बार हालांकि ध्यान रखना ये माला नहीं है ये माला नहीं बोलने में आ जाता है कि एक माला फेरना पर ये मेडिटेशन है मेडिटेशन का तात्पर्य माला नहीं होता है वहां हमें लिखा हुआ देखना है शर्त क्या है रिजल्ट चाहिए तो लिखा हुआ देखो। आंखों को बंद करो। यहां ध्यान ले जाओ। क्योंकि जब तक यहां ध्यान नहीं ले जाओगे, एकाग्र नहीं होगे, यहां देखोगे नहीं तब तक वह स्थान एक्टिव नहीं होने वाला। उस स्थान को एक्टिव करने के लिए वहां आंखों को बंद करके वहां रोम को स्वर्णमय चमकता हुआ आपको देखना होगा। पीले वर्ण से देखना होगा। पीला वर्ण इसलिए बोल रहा हूं। वैसे उसमें वर्ण नहीं दिया है पर मैंने स्वर्ण वाला जो है बहुत जल्दी लिखा जाता है। बहुत जल्दी यूज़ हो जाता है। इसलिए स्वर्णमय ही दिया है मैंने। आप चाहे तो कलर बदल भी सकते हैं। लेकिन आप जब तक लिखोगे नहीं तब तक वो जो बीजाक्षर है उसका प्रभाव आपके जीवन में आपको नहीं मिलेगा। तो आपको वहां लिखना है। वहां देखना है। वहां पर पूरे समय एकाग्र होना है। और वहीं पर नहीं पूरे इन बीजाक्षर में वहां पर आपको देखना होगा। तो लिखो, देखो पढ़ो और मंत्र क्या पढ़ना है? ओम रोम सिर पश्चिमे लिखना यह है और पढ़ना इस बीजा अक्षर को मंत्र ओम रोम सिर पश्चिमे पढ़ना है और लिखना रोम है कहां से वहां वहां से देखकर आपको पढ़ना रोम को वहां से पढ़ना है और उच्चारण ओम रोम सिर पश्चिम में करना है मन से करना है मुख मुख से नहीं ये ध्यान है ये मैं सिखाने के लिए आपको करा रहा हूं ये जो बार-बार जो उच्चारण करता हूं आप सीख जाओ लेकिन उसमें एक स्टेप कराता हूं मैं उच्चारण की एक कराता हूं होठ हिलना चाहिए है ना जी अपने को तीसरी स्टेप जो होती है वो मुख्य है मतलब वो आपको मन से करना है इसी प्रकार से अंत में भी चार मिनट पांच तीन चार मिनट कराता हूं वो जो अंत वाली तीसरी स्टेप है और जो अंत में चार मिनट है वही ध्यान है और उसी ध्यान को हमें बहुत अच्छे से करना है चलते हैं बहुत ध्यान के साथ ओम रम सिरपस बाकी बीजाक्षर हो गए पूरे एक एक बार सबको विजुअलाइज कर दिया ना मैंने पूरे बता दिए नहीं बताए बताना है अब आगे वाले बता दे रहा हूं ठीक ओम रमस्तकोपरी सिर के ऊपर ठीक ठीक इसका फल आदेश हम बताएंगे आपको कल क्षमाम नेत्रयो ठीक दोनों नेत्रों पर क्षमाम ओम क्षमाम नेत्र फिर उसके बाद छिमि मुख पर दोनों होठों पर छमम ओम क्षम मुखे फिर कंठ पर ओम क्षम कंठे हृदय पर ओम क्षमोम हृदय नाभि पर ओम क्षमा सॉरी नाभि कहा के बाद कहां जाएंगे हम कहां जाएंगे ओम क्षमा बायो जल्दी भैया दोनों बाजु बंद पर ओम क्षमा बायो इस प्रकार से लिखिए आप फिर उसके बाद पेट पर ओम क्रोम उतरे पीठ पर ओम ह्रीम कट्याम जगहों पर ओम ब्लूम जंग पैरों के पंज पर ओम क्षम पाद हथेली पर ओम क्ष हस्त ठीक चलते हैं अब सीधे ध्यान की प्रक्रिया पर आते हैं हम पाइप स्टेप और हीलिंग हमारी हो गई अब जो लोग छूट गए सो छूट गए आंखें बंद हाथ पर हाथ रखें आप ठीक और ये वाली उंगली चार उंगली पर चार उंगली अंगूठे पर अंगूठा और रीड सीधी आंखें बंद एक मिनट का लिए श्वास श्वास पर ध्यान स्वास आ रही है स्वास जा रही है पूरा ऑब्जरवेशन श्वास पर पूरा ध्यान श्वास पर और अब श्वास को देखते हुए पूरे मनोभाव के साथ हम चल रहे हैं पूरे ध्यान के साथ चल रहे है अच्छा पूरे ध्यान के साथ चल रहे हैं हम और अब उच्चारण कर रहे हैं आप मानना यह मेरी नाभि पर रम लिखा हुआ ह और अनुस्वार स्वर्णमय चमकता मैं अपनी नाभि पर देख रहा हूं स्वर्णमय हरम चमकता हुआ और अब मैं उच्चारण कर रहा हूं आवाज मेरी नाभि से आ रही है महाराज जी की आवाज नहीं मेरी नाभि की आवाज है फिर आपको बोलना है ओम रम जठरे ओम रम जठरे ओम रम जठ हरे ओम रम जठरे ओम रम जठ हरे ओम रम जठरे ओम रम जठरे ओम रम जठरे ओम रम जठ हरे ओम रम जठरे ओम रम जठ हरे ओम रम जठ हरे होठ हिलना चाहिए आपके ओम रम ज ओम रम ज दो ओम रम ज तीन ओम ज चार ओम ज पांच अब होठ भी नहीं हिलना चाहिए मन से करना है आएंगे दोनों बाहों के मध्य में आएंगे हराम ह में आ की मात्रा रेफ अनुसार हराम दोनों भों के मध्य में लिखें हराम बीजाक्षर को बहुत ध्यान से लिखें स्वर्णमय चमकता हुआ एकाग्रता फोकस करने के लिए बच्चों के काम का हराम दोनों बहुओं के मध्य में लिखा हुआ देखो स्वर्णमय चमकता राम दोनों बहुओं के मध्य में ओम राम ललाटे ओम राम ललाटे ओम राम ललाटे ओम राम ललाटे ओम राम ललाटे ओम राम ललाटे और ध्यान से ओम राम ललाटे ओम राम ललाटे दोनों भाव के मध्य में राम को लिखा हुआ देख रहे हैं पूरा ऑब्जरवेशन पूरा ध्यान राम चार बार उच्चारण करें ओम राम लाटे एक ओम राम लाटे दो ओम राम लाटे ओम ला ओम राम लाटे पांच अब बिना उच्चारण बिना जीभ हिलाए आएंगे बाएं कान पर आए बहुत ध्यान से लेफ्ट ईयर पर आए लेफ्ट कान बाएं कान पर आए और रीम हरी लिखें बाएं कान पर बहुत ध्यान से हम को लिखेंगे मेरे बाएं कान पर हरीम ह में बड़ी ई की मात्रा रेफ ह को बाएं कान पर लिख रहा हूं ये रीम बीजाक्षर क्या कर देगा कहते हैं बहुत ध्यान से देखें ह के माध्यम से नकारात्मकता नहीं सुनना अंदर सुनना ओम ह्रीम बम करणे ओम ह्रीम करण ओम ह्रीम बम करणे ओम ह्रीम करणे बाएं कान पर ओम ह्रीम बम करणे ओम ह्रीम करण बाएं कान पर ओम ह्रीम करण ओम ह्रीम करण ओम ह्रीम करण ओम ह्रीम करण ओम ह्रीम वाम करणे ओम ह्रीम करण कान से ओम वाम करण को देख रहे हैं उच्चारण करना चाहिए ओम करण तीन ओम करणे चार ओम वाम करण पांच और अब बहुत ध्यान से मन से उच्चारण करें आप आएंगे दाहिने कान पर हुरूम हम में बड़ा ऊ की मात्रा रेसा हुरूम दाहिने कान पर बहुत ध्यान से लिख रहे हैं आप दाहिने कान परम को देखिए प्रयास करें हुरूम को ये लेक्चर सुनने के लिए ये आपको कहीं कठिन विषय पढ़ने के लिए रूम दक्षिण ओम रूम दक्षिण करणे ओम रूम दक्षिण करणे ओम रूम दक्षिण करणे ओम रूम दक्षिण करणे दाहिने कान पर ओम रूम दक्षिण करणे ओम रूम दक्षिण करणे ओम रूम दक्षिण करणे ओम रूम दक्षिण करण बहुत ध्यान से रूम को देख रहे हैं आप बहुत एकाग्रता से देख दाहिने कान पर रूम को स्वर्णमय चमकता हुआ देख रहा हूं मैं हां ओम रूम दक्षिण करने एक ओम रूम दक्षिण करने दो ओम दक्षिण करें तीन ओम दक्षिण करण चार ओम दक्षिण अब उच्चारण करो होठ से होठ से उच्चारण करो सॉरी होठ को नहीं मुख से मन से उच्चारण करो सिर के पीछे आए हरो ह में औ की मात्रा रोई फ अनुस्वार हरो ये आज इसका अर्थ बताया एक पार्टी बनने के लिए बुद्धि को बढ़ाने के लिए अपनी पावर अपनी एक्टिविटी को बढ़ाने के लिए हरो मंदबुद्धि बच्चों के काम कमजोर बच्चों के काम का रोम सिर के पीछे ओम रोम सिरा पश्चिमे ओम रोम सिरा पश्चिमे ओम रोम सिरा पश्चिमे सिरा पश्चिमे ओम रोम सिरा पश्चिमे ओम रोम सिरा पश्चिमे ओम रोम सिरा पश्चिमे ओम रोम सिरा पश्चिमे बहुत ध्यान से रोम को लिखो देखो मेरा पूरा प्रयास स्वर्णमय चमकता होम सिर के पीछे बालों के नीचे देख ओम रोम पश्च ओम रोमस ओम पस ओम सरस फिर उसके बाद रोम को देख रहे हैं बहुत ध्यान से मन ही मन उच्चारण करें मस्तक के ऊपर आए बहुत ध्यान से और अब हरा मस्तक पर हरा देख रहे हैं आप ह रे और विसर्ग मस्तक के जिसको नहीं बनता है स्क्रीन पे देख लिया करें पर गलत नहीं करना ध्यान रखना है ना हरा सिर के ऊपर बहुत ध्यान से ओम रामस्त को परी ओम रामस्त को परी ओम रामस्त को परी ओम रामस्त को परी ओम रामस्त को परी [गाना गाने की आवाज़] ओम रामस्त को परी ओम रामस्तको परी ओम रामस्त को परी बहुत ध्यान से सिर के पररा को देख रहे हैं पूरा पूरा ऑब्जरवेशन मेरे सिर पर हरा को देख रहा हूं कंप्लीट बहुत ध्यान से देख को चार बार उच्चारण करें ओम नमस्ते एक ओम नमस्त दो ओम नमस्तु तीन ओम नमस्तु चार ओम नमस्त मन से करें अब अब आएंगे नेत्रों पर बहुत ध्यान से क्षमाम लिखें आधा क्ष म में आ की मात्रा अनुसार क्षमाम लेफ्ट में भी क्षमाम राइट में भी क्षमाम दोनों तरफ क्षमाम को लिख रहे हैं आप पूरा ऑब्जरवेशन क्षमाम पर क्या होगा इससे बहुत ध्यान से देखो बहुत एकाग्रता क्षमाम दोनों नेत्रों पर पहले लेफ्ट में ओम क्षमामम नेत्रयो ओम क्षमाम नेत्रयो राइट में ओम क्षमाम नेत्रयो ओम क्षमाम नेत्रयो लेफ्ट में ओम क्षमाम नेत्रयो ओम क्षमाम नेत्रयो राइट में ओम क्षमाम नेत्रयो ओम क्षमाम नेत्रयो देखिए बहुत ध्यान से क्षमाम को लिखा हुआ देख रहे हैं आप नेत्रों पर लिख रहे हैं आप दोनों नेत्र पर लेफ्ट राइट क्षमा ओम क्षम नेत्रयो अब मन से करना है। अब कैसे उच्चारण करना है? होठ से ओम एक ओम दो होठ नहीं हिल रहे आपके। ओम तीन ओम चार ओम पांच ओम। अब आप बिना अभय उठ लाए मन से करें। अब दोनों होठों पर आए। छिमीम आधा अक्ष म में बड़ी की मात्रा क्षिमीम को देख रहे हैं आप। क्या होगा ये छमी बीजाक्षर? बहुत ध्यान से देख रहे हैं आप। इससे वाणी बहुत ध्यान से देखिए वाणी के काम का बीजाक्षर है छिमम ओम क्षिम मुखे ओम छिम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे ओम क्षम मुखे बहुत ध्यान से छ को देख रहे हैं आप पूरा ऑब्जरवेशन अपने दोनों ओठ पर बीजाक्षर उच्चारण कर देखिए बहुत ध्यान से देखिए आप ओम श्री मुखी एक ओम श्री मुखे दो ओम मुखे तीन ओम मुखे चार ओम श्री मुखे पांच और अब मन से उच्चारण करें कंठ पर आए क्षुमम को करेंगे कंठ पर बहुत ध्यान से क्षम को करें आधा क्षम में बड़ा औ की मात्रा अनुस्वार क्षुमम कंठ पर और ध्यान से देखो कंठ पर छुमम को स्वर्णमय चमकता हुआ हां देख रहे हैं हम जिनको नहीं बन रहा है स्क्रीन पर देख क्षुमम कंठ पर ओम क्षमम कंठे ओम क्षम कंठे ओम क्षमम कंठे ओम क्षम कंठे ओम क्षमम कंठे ओम क्षम कंठे ओम क्षम कंठे ओम क्षम कंठे और ध्यान से कंठ पर देख रहे हैं अपना पूरा कंठ पर ओम क्षम कंठे एक ओम क्षम कंठे दो ओम क्षम कंठे तीन ओम क्षम कंठे सात ओम क्षम कंठे पांच देखिए बहुत ध्यान से क्षम को कंठ पर देखते हुए अब मन से उच्चारण करें आप होठ नहीं हिलना चाहिए जीभ नहीं हिलना चाहिए आएंगे और अब बहुत ध्यान से ह्रदय पर आए आधा क्षम म में औ की मात्रा क्षम हृदय पर हां बहुत ध्यान से देखें स्वर्ण में चमकता हुआ क्षम मेरे हृदय पर मैं देख रहा हूं। ओम क्षमम हृदय ओम क्षमाम हृदय देखो हृदय पर ओम क्षम हृदय ओम क्षमाम हृदय ओम क्षम हृदय ओम क्षमाम हृदय हृदय पर ओम क्षमाम हृदय ओम क्षमाम हृदय ओम क्षमाम हृदय ओम क्षमाम हृदय बहुत ध्यान से आधा क्षमा की मात्रा क्षम को हृदय पर लिख रहे हैं उच्चारण करें देखिए ध्यान से ओम क्षम ह एक ओम क्षम दो ओम क्षम तीन ओम क्षम चार ओम क्षम पांच अब इस क्षमा भुजाक्षर को मन से उच्चारण करें और अब बाजू बंद पर आए बहुत ध्यान से क्षमा आधा क्षमा मा विसर्ग लेफ्ट में क्षमा राइट में आधा क्षमा विसर्ग क्षमा लेफ्ट राइट दोनों तरफ लिख रहे हैं आप बहुत ध्यान से लिखे देखें पूरा प्रयास करें क्षमा पर लेफ्ट राइट दोनों तरफ लेफ्ट अम ओम क्षम वाहयो ओम क्षमा वायो राइट में ओम क्षमा वायो ओम क्षमा लेफ्ट में ओम क्षमा वायु ओम क्षमा राइट में ओम क्षमा वायो ओम क्षमा लेफ्ट में ओम क्षमा वायो ओम क्षमा राइट ओम क्षमा वायो ओम क्षमा अब बहुत ध्यान से अब देखो मैं अपने दोनों बाजुब पर देख रहा हूं आधा महा विसर्ग और देखकर उच्चारण करो पूरा ऑब्जरवेशन वही लेफ्ट बाज पर क्षमा राइट बाजु लेफ्ट में क्षमा तीन राइट में क्षमा चार लेफ्ट में क्षमा पांच राइट में क्षमा वायु छह और अब पूरे मनोभाव से क्षमा बीजा अक्षर को मन से उच्चारण करें और आप पेट पर आए बहुत ध्यान से पेट पर आए क्रोम को लिखें कम औ की मात्रा रेफ अनुसार क्रोम पेट पर लिख रहे हैं बहुत ध्यान से क्रोम को आप पूरा ऑब्जरवेशन स्वर्णमय चमकता हुआ क्रोम कम औ की मात्रा क्रोम स्वर्णमय ओम क्रोम उदरे उदरे ओम क्रोम उदरे ओम क्रोम उदरे देखो ना स्वर्णमय चमकता क्रोम पेट पर ओम क्रोम उदरे ओम क्रोम उदरे ओम क्रोम उदरे ओम क्रोम [गाना गाने की आवाज़] ओम क्रोमरे ओम क्रोमरे देखिए ध्यान से क्रोम को देख रहे हैं चार बार चरण करो एक ओम क्रोम दो स्वर्ण में चमकता हूं ओम क्रोम तीन ओम क्रोम चार ओम क्रोम पांच मन से उच्चारण करें फिर इसके बाद आएंगे पीठ पर आएंगे पीछे की ओर रीम ह में बड़ी की माता दोनों तरफ लेफ्ट में रीम राइट में रीम दोनों तरफ रीम लिख रहे हैं आप बहुत ध्यान से देखें आप अपने आप को एकाग कर ले मेरी पीठ पर रीम लिख रहा हूं मैं दोनों लेफ्ट राइट दोनों तरफ रीम को लिखा मैंने हां देखें लेफ्ट में तरफ ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम राइट वाली उसमें ओम ह्रीम कट्यम ओम ह्रीम कट्याम लेफ्ट ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम राइट ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम ओम ह्रीम कट्याम बहुत ध्यान से आप देखें उच्चारण करें देखो भैया देखोगे तभी तो उच्चारण होगा देख के उच्चारण करो कट एक लेफ्ट में कट दो राइट में कट तीन लेफ्ट में कट चार राइट में पांच लेफ्ट में छ राइट में अब मन से उच्चारण करो और अब बहुत ध्यान के साथ अब आप आओ बहुत सुंदर बीजाक्षर ब्लूम पर कहां है ब्लूम मेरी जगहों पर आ रहा हूं मैं मेरी थाई पर आ रहा हूं मैं और थाई पर लिख रहा हूं आ धा में बड़ा ऊ की मात्रा उस पर ब्लूम लेफ्ट में ब्लूम राइट में ब्लूम देखो लिखा हुआ देखो देखो जब तक लिखा हुआ नहीं देखो कोई मतलब हां यह मेडिटेशन है। यह उच्चारण वाला नहीं है। यह ध्यान है। इसमें आपको लिखा हुआ ऑर्गन्स पर देखना होगा। थाई पर जगहों पर लिखा देखो ब्लूम। बहुत ध्यान से देखो। स्वर्ण में चमकता हुआ ब्लूम। मैं अपने कहां से देख रहा हूं? थाई पर लेफ्ट में राइट में दोनों तरफ। लेफ्ट में। अब जब मैं लेफ्ट टूल तो वहां लिखा हुआ देखो। पढ़ो। ओम ब्लूम जंगयो ओम ब्लूम जंगयो। राइट तरफ ओम ब्लूम जंगयो ओम ब्लूम जंगयो लेफ्ट तरफ ओम ब्लूम जंगयो ओम ब्लूम जंगयो राइट तरफ ओम ब्लूम जंगयो ओम ब्लूम जंगयो लेफ्ट तरफ ओम ब्लूम जंगयो ओम ब्लूम जंगयो राइट तरफ ओम ब्लूम जंगयो ओम ब्लूम जंगयो हां उच्चारण करें उच्चारण करेंगे देखकर उच्चारण करो होटल नीचे ओम बम जंग एक लेफ्ट में ओम जंग दो राइट में ओम नंबर तीन लेफ्ट ब्लूम नंबर चार राइट ब्लूमो लेफ्ट छह राइट और आप इस ब्लूम को बहुत ध्यान से मन ही मन करो अब बिना होए आ रहे अपनी हथेली पर आए बहुत सॉरी अपने पैरों के पंजो पर आए आप बहुत ध्यान से पैर के पंजो पर आए छूम छ में बड़ा ऊ की मात्रा अनुस्वार छू दोनों तरफ पैर के पंजों पर छूम को देख रहे हैं आप ये छूम क्या कर देगा कहते हैं इस छूम के माध्यम से बहुत ध्यान से देखो बहुत एकाग्रता से देखो काम का छूम पैरों के पंच पर ओम क्षम पादयो ओम छम पादो स्वर्णमय चमकताम ओम क्षम पादयो ओम पादो पैर के पंच ओम क्षम पादयो ओम पाद लेफ्ट में ओम क्षम पादो ओम पाद राइट में ओम पादयो पाद लेफ्ट में ओम पादो पाद राइट में ओम पाद पाद बहुत ध्यान से बुजर को लिखने का प्रयास करें मैं उच्चारण कर रहा हूं एक लेफ्ट राइट तीन लेफ्ट चार लेफ्ट ओम पांच लेफ्ट छ और अब हथेली पर आए बहुत ध्यान से आप हथेली पर आ रहे और नहीं नहीं पहले मन से उच्चारण कर ले हथेली पर आ जाए छ हथेली पर आ जाए छ बीजाक्षर लिख रहे अपनी हथेली पर बहुत ध्यान से छ को लिख रहे क्या करेगा ये दोनों हथेली पर छ बीजाक्षर को लिख रहे बहुत ध्यान से स्वर्णमय चमकता छ दोनों हथेली पर फिर लेफ्ट में ओम क्ष हस्तयो [गाना गाने की आवाज़] ओम क्ष हस्तयो राइट में ओम क्ष हस्तयो ओम क्ष हस्तयो लेफ्ट में ओम क्ष हस्तयो ओम क्षस्तयो राइट में ओम क्ष हस्तयो ओम क्षस्त लेफ्ट में ओम क्ष हस्तयो ओम छ हस्त राइट में ओम क्ष हस्तयो ओम छ हस्त बहुत ध्यान से छ को लिखें बहुत ध्यान से लिख रहे हैं चार बार देखो बहुत ध्यान से देखो ओम शास्तु लेफ्ट में ओम राइट में ओम शास्त लेफ्ट में ओम शास्तु तीन राइट में ओम शास्त लेफ्ट में ओम शास्त्र पांच राइट में ओम शास्त्र छ अब परे मनो भाव के साथ मन से उच्चारण करो आंखें बंद रीड एकदम सीधी रखते हुए इन बीजा अक्षरों को मन से उच्चारण करना है आपको लिखना है और मन से मेडिटेशन करना जिनको पूरा आता है वह तो पूरा करें हां बहुत अच्छे से करें पूरे मनोभाव से करें और जिनको पूरा नहीं आता है तो पेट की बीमारी वाले हरम ओम रम जट रहे एकाग्रता को बढ़ाने के लिए राम लट पर ओम राम लट और बहुत ध्यान के साथ अगर मान लीजिए बुद्धि को बढ़ाना है तो कौन सा ह सकते हैं बुद्धि को बढ़ाना है तो पीछे ओम रोम सिर्फ जो आज बताया है बहुत ध्यान से लेक्चर सुनने के लिए ओम रोम दक्षण कर करें आप जो बीजाक्षर आपको अच्छा लगता है करें बार-बार रिवाइज करें पूरे आ जाए तो सबसे उत्तम हां और जो आपके काम का है उसको बार-बार होठ नहीं हिलना चाहिए। होठ हिल रहे हैं। बिना होठ हिले उच्चारित करना है आपको। जीभ नहीं हिलना चाहिए। होठ नहीं हिलना चाहिए। बिना होठ हिलाए। आप बार-बार बार-बार उसका उच्चारण करें। बार-बार रिवाइज करें उसको। बार-बार देखें उसको। देखने का प्रयास करो। बार-बार उच्चारण करो। उच्चारण मतलब ध्यान रखना होठ जीभ तालु कंठन से नहीं मन से उच्चारण करो। मन से मेडिटेशन करो। लिखा हुआ देखो फिर उच्चारण करो। फिर आपको जो फल चाहिए उस फल पर आप काम करो। बहुत ध्यान के साथ देखो। पूरा प्रयास करो। मैं देख रहा हूं। पूर्ण एकाग्रता के साथ पूरी स्थिरता के साथ देख रहा हूं। मेरा पूरा ध्यान, मेरी पूरी स्थिरता, मेरी पूरी एकाग्रता, मेरा पूरा फोकस है वहां पर। देखो बार-बार देखो बार-बार उच्चारण करो और एक काम करो जीभ को पीछे रख लो तो और अच्छा रहेगा ट ट ट वाले स्थान पर जीभ को रख लो इससे और फोकस बढ़ेगा इससे और अच्छा रहेगा पीछे जीभ चिपका लो टच कर लो पीछे जीभ को करो बार-बार उच्चारण उच्चारण नहीं सॉरी मन ही मन उच्चारण मतलब ध्यान रखना जीभ को पीछे टच करते हैं ट ट ड ना आगे नहीं पीछे मोड़ कर ले जाकर पीछे घुमाओ मोड़ो पीछे टच करो यही साधना ऐसे सिद्धि होगी। लिखो पढ़ो बार-बार रिवाइज करो। बहुत अच्छा आंखें बंद रीड एकदम सीधी और अब मैं जो बोल रहा हूं उस पर ध्यान मैं बहुत अच्छी आत्मा आंखे बंद रीड सीधी रखो हिलो नहीं मैं बहुत अच्छी आत्मा हूं मैं अहिंसा धर्म को पालने वाली आत्मा हूं हां सच में आप अपने आप को आंखों को बंद करके देखो मैं चल रहा हूं कैसे चल रहा हूं? चार हाथ देखकर एक एक जीवो को बचाओ। दया और करुणा भाव से चल रहा हूं। अपनी फिल्म देखो चलते हुए। हां क्योंकि आप अहिंसा धर्म को पालने वाली आत्मा है। मैं हितमित्र प्रिय और सत्य बोलने वाली आत्मा हूं। सती मेरे जीवन का आधार है। झूठ बोलने वाली आत्मा नहीं हूं। धोखा देने वाली आत्मा नहीं हूं। बिल्कुल नहीं। मुझे किसी को धोखा नहीं देना है। बिल्कुल निश्चित सबका भला करना है मुझे। किसी के साथ गलत नहीं। और मैं तुलना करने वाली आत्मा भी नहीं हूं। नो कंपटीशन नो कंपैरिजन तुलना मेरे जीवन में नहीं है। सब लोग आंखें बंद कर लो। हां आप लोग भी कर लो आंखें बंद दो तीन मिनट के लिए। मैं तुलना करने नो कंपटीशन नो कंपैरिजन। मेरी जैसी आत्मा कोई है ही नहीं। निश्चित रूप से मैं अपने आप का कल्याण करना चाहता हूं। तो मुझे तुलना नहीं करना है। मैं दूसरों की अच्छाई पर जलने वाली आत्मा भी नहीं हूं। कैसी आत्मा हूं? मेरे जीवन का मंगलमय मंत्र क्या है? देख दूसरों की बढ़ती को ये मेरे जीवन का मंगलमय मंत्र है कि और मेरे कान भी अपनी प्रशंसा सुनने के भूखे नहीं रहते। मुझे नहीं पूछना किसी से कि मैं कैसा बोलता हूं। मैं कैसा देखता हूं। ना ही अपने मुख से मुझे कभी अपनी स्वयं की प्रशंसा करना है। बिल्कुल नहीं करना है। हां बिल्कुल नहीं करना। और मैं बुराई, कमियां, गलतियां देखने वाली आत्मा नहीं हूं। मैं तो अच्छाई और गुणों को देखते हुए उनका गुणगान करने वाली आत्मा हूं। और मेरी हर सोच मेरा हर संकल्प पवित्र है। मैं तो जो बोलता हूं सबके हृदय में उतरने वाला सबके जीवन को बदलने वाला प्रभावकारी ओजसी वचन होता है। मेरे बोलने से सब मानते हैं और अपने जीवन को धन्य बनाते हैं। बिल्कुल और अब आंखों को बंद करें। जिन्हें आप अपना इष्ट मानते हैं, गुरु मानते हैं उन्हें आंखों को बंद करके देखें आप। बिल्कुल जो भी आपके लगते कि यहां हमारा माथा झुक जाता है उनकी उस आकृति को देखें और अब नमोस्तु करें वो आपको आशीर्वाद दे रहे हैं। मैं मेरे गुरु का सबसे प्रिय शिष्य हूं। गुरुदेव सबसे ज्यादा मुझे ही चाहते हैं। मेरा ही ध्यान रखें। सच में इनकी कृपा से मेरा सब कुछ भला होता चल रहा है। और मैं इनके चरणों में बारंबार नमन करके इनकी कृपा मेरे लिए हमेशा बनी रहे। और अपने साथ में रहने वाले लोगों को देखें। अपने माता-पिता, अपने भाई बहन, अपने बच्चे, अपनी पत्नी, अपने परिवार के और अन्य लोगों को देखें। इन सभी को देखने का प्रयास करें। ये सभी लोग बहुत अच्छे हैं। मेरी बहुत विनय करते हैं। मेरा बहुत ध्यान रखते हैं। सच में मेरा बहुत पुण्य है। ये जो परिवार के सबको चेहरा देख रहा हूं। उनके भाई ये कितने अच्छे हैं। मेरे हर कार्य में सहयोगी हैं। मेरी हर बात को मानने वाले हैं। मेरा बहुत पुण्य है। इतने अच्छे लोगों के साथ रहने का अवसर मिल रहा है। अब विचार करें देखें आपका सच में आप अगर नहीं भी आपके साथ ऐसा है तो घटेगा। लेकिन फिल्म यही देखें सब अच्छे हैं। किसी का बुरा नहीं देखें। आप तो सबको अच्छा महत्व देखें। और क्या देखना है? बहुत ध्यान से देखें। मैं कैसी आत्मा हूं। मैं अपेक्षा से परे रहने वाली आत्मा नहीं हूं। मैं अपेक्षा से परे रहने वाली आत्मा नहीं हूं। कैसी आत्मा हूं? मैं तो निश्चित रूप से सबका भला करने वाली आत्मा हूं। और मैं छोटी-छोटी बात को लेकर बैठे रहने वाली आत्मा नहीं हूं। कैसी आत्मा हूं? आया और गया। निकालने वाली आत्मा हूं। और निश्चित रूप से मेरे जीवन का मंगलमय मंत्र है। मैं तो सहन करने वाली आत्मा हूं। मैं तो बोलो ना सहन करने वाली आत्मा हूं। क्यों? क्योंकि निश्चित रूप से आया गया करने वाली आत्मा हूं। कोई राग नहीं, कोई द्वेष नहीं, कोई भी गठान नहीं। सबको बाहर करने वाली आत्मा हूं। और मैं अपनी गलतियों को स्वीकारने वाली आत्मा हूं। उन गलतियों को सुधारने वाली आत्मा हूं। और मैं तो सबसे संतुष्ट रहने वाली आत्मा हूं। और मैं किसी आत्मा हूं। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। और मेरे जीवन का मंगलमय मंत्र क्या है? जीवन के हर मोड़ पर मुझे क्या बोलना है? इसमें भी बोलो ना। इसमें भी इसमें भी और मैं अपने करने योग्य कर्तव्य के प्रति सजग और सावधान रहने वाली आत्मा हूं। जो जो मेरे कर्तव्य हैं उन सब जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से निर्वाह करने वाली आत्मा हूं। हां क्योंकि मुझे एक कैसी आत्मा बनना है? कर्तव्य पालन करने वाली आत्मा कैसी होती है? आज के प्रवचन में सज्जन आत्मा है ना? तो मुझे सज्जन आत्मा बनना है। तो सज्जन प्रवृत्ति के व्यक्तित्व मुझे जुड़ना है तो मेरे कर्तव्य और मेरी जिम्मेदारी को रोज ऑब्जर्व करके देखने वाली आत्मा हूं। मैं अपने नियमों को बहुत अच्छे से पालने वाली आत्मा हूं। जो जो मेरे नियम है उन सब नियमों को पालने वाली आत्मा हूं। मैं तो सबके दर्द और कष्ट को दूर करने वाली आत्मा हूं। मैं तो सबके दर्द को अपना मानने वाली आत्मा हूं। मेरा हर भूल मेरा हर व्यवहार सबके लिए दुआएं हैं। मैं तो सुख देने वाली आत्मा हूं। मैं तो प्रेम बांटने वाली आत्मा हूं। मैं तो वात्सल्य बिखेरने वाली आत्मा हूं। मैं तो स्नेह से सबको ओतप्रोत कर देने वाली आत्मा हूं। मेरा पूरा जीवन करुणामय है। मैं परोपकार के लिए समर्पित रहने वाली आत्मा हूं। बड़ों को विनय और सम्मान देने वाली आत्मा हूं। निराकुल आत्मा हूं, पवित्र आत्मा हूं, सुखी आत्मा हूं, शांत आत्मा हूं, शक्तिशाली आत्मा हूं, इंद्रियों की राजा हूं। मन की मालिक हूं। ऐसी सहज ज्ञाता दृष्टा भाव श्रेणी मंगलमय पवित्र आत्मा हूं। मंगलमय पवित्र आत्मा हूं। मंगलमय दोनों हाथों को बाहर लाएंगे। देखें स्क्रीन की तरफ देखें आप। एक मिनट स्क्रीन की तरफ देखें आप। देखिए बिल्कुल वैसे ही आपको हाथ करना है और मानना देखो स्किन से कैसे निकल रहा है वह कैसी ऊर्जा निकल रही है देखो ऊर्जा कैसे फील हो रही है कैसी बाहर हो रही है ऊर्जा बस ऐसी ऊर्जा मेरे दोनों हथेली से निकल रही है आप फील करो कि मेरे दोनों हथेली के बीच में गर्माहट आ गई हां मेरे दोनों हथेली आंखें बंद करो फील करो भाई कि मेरी आंखें बंद करो पूरा ध्यान वही हथेली पर और ध्यान से फील करो कि मेरी हथेली के बीच से कुछ ना कुछ निकल रहा है। वो गर्माहट, वो भारीपन, वो किरणें, वो प्रताप, वो प्रकाश, वो संवेदनशीलता मेरे दोनों हथेली के बीच से निकल रही है। मैं देख रहा हूं कि मेरे दोनों हथेली के बीच से कुछ बाहर हो रहा है। इसको निकलता हुआ मैं अपने पूरे मनोभाव से विजुअलाइज कर रहा हूं। और यह जो निकल रहा है इस निकलते हुए को बड़े मनोभाव से देखें आप। और यह जो निकल रहा है यह कोई सामान्य नहीं है। आपके अंदर की ताकत ऊर्जा है। अब जो लोग बीमार है जो लोग अस्वस्थ हैं आपके अपने परिवार के लोग उनका चेहरा सामने देखें। ऊर्जा पहुंचाएं। ये मेरी ऊर्जा जा रही है। उन सब की पीड़ाएं, उन सबके रोग, उन सब की व्याधियां, उन सब की तकलीफ, उनके जीवन की परेशानियां, कष्ट, समस्याएं सब समाप्त वो सुखी हो रहे हैं। उनके जीवन शांति, प्रेम, वासल, स्नेह बढ़ता चला जा रहा है। फिर उसके बाद इस परिसर में जितने लोग बैठे हैं वह जिनवाणी चैनल के माध्यम से जो लोग ऑनलाइन ध्यान कर रहे हैं वह जो विद्या शरणम के माध्यम से ध्यान अटेंड कर रहे हैं वो उन सभी को यहां से हम अपनी ऊर्जा को भेज रहे हैं कि सबकी पीड़ाएं समाप्त हो रही है। सबके रोग दूर हो रहे हैं। सबकी व्याधियां दूर हो रही है। सबकी चिंताएं दूर हो रही है। सबकी आकुलताएं दूर हो रही है। सबकी व्याकुलताएं दूर हो रही है। सब की समस्याएं दूर हो रही है। जीवन की परेशानियां दूर हो रही है। विघ्न बाधाएं दूर हो रही है। सब स्वस्थ हो रहे हैं। सब निरोगी हो रहे हैं। सबके जीवन में निश्चित रूप से सुख आ रहा है। शांति आ रही है। प्रेम आ रहा है। सबका जीवन वात्सल्य और स्नेह से भरता चला जा रहा है। सबका जीवन एक मंगलमय और पवित्र हो रहा है। और अब पूरे मनोभाव से अपने इन दोनों हाथों को लगाएं। चेहरे पर लगाएं। भावना है। मैं अपने इन दोनों हाथों को स्पर्श कर रहा हूं। मैं निरोगी बन रहा हूं। मेरी पीड़ाएं समाप्त हो रही है। मेरे कष्ट समाप्त हो रहे हैं। मेरे जीवन की तकलीफें दूर हो रही है। मेरे जीवन की परेशानियां समाप्त हो रही है। स्वस्थ हो रहा हूं। निरोगी हो रहा हूं। मेरे जीवन में कोई भी तकलीफ मानसिक शारीरिक सब प्रकार की व्याधियां सब कुछ बाहर होते चली जा रही है। इस ऊर्जा से सच में अपने आप को मैंने निरोगी बना लिया और जहां पर दर्द हो वहां पर जहां पर तकलीफ हो उस ऑर्गन्स पर विशेष रूप से इस ऊर्जा को पहुंचाएं और अपने आप को स्वस्थ और निरोगी बनाएं। और अब कल का नियम क्या था? कल का जो नियम था वो था दही खाने का त्याग। आप लोग गड़बड़ करते हो आज हमें याद नहीं रहा। कोई बात नहीं। अब अगला कल का नियम तो बहुत अच्छा है और पिपरी वालों के लिए तो और अच्छा है। इसलिए क्योंकि यह नियम पिपरी वाले तो बहुत अच्छे से पाल सकते हैं। चाहे तो बाकी तो अब मान लीजिए वो बैठे हमारे कहां के अजयगढ़ वाले अचलगढ़ अचलगढ़ है ना? और कहां के बैठे हैं ये? सेहराई वाले। अब ये चाहे तो ये पाल सकते हैं। वहां नहीं लेकिन उनको यहां आना पड़ेगा। तब वो पाल पाएंगे। कल का नियम तो कल का नियम बड़ा अच्छा है। कल का नियम क्या है? साधु संत की सेवा करना। ठीक? अब आप लोग भी आहार देकर सेवा कर सकते हैं। ऐसा नहीं कि नहीं कर सकते। हम कहां से कह रहे महाराज जी माता जी है नहीं तो माता जी नहीं है तो दीदियां तो है। प्रतिभा स्थल की दीदी आपके बीच में आ गई है। आप उनकी सेवा करना। ठीक? दो तीन चार दीदियां और उनकी सेवा करना। ठीक? और उनको आहार कराना। ये आपकी सेवा है और साधुओं जो है चार चार महाराज जी हैं उन सबके आहार कराना यही सेवा आपकी रहेगी तो कल का नियम क्या है साधु संत की सेवा करने का कल का आपका ये नियम है ठीक बहुत अच्छा चलते हैं और अब प्रमुख बात ये कि ये ज्ञान कल्याणक के जो बीजाक्षर है इनको आप नोट डाउन करते जाना ठीक है ना इनके आठ फिर मैं कह रहा हूं इतने सारे लोग आकर बैठ गए लेकिन ये जो लोग आए हैं मैं ये कह रहा हूं कि आप जो शुरू का वो पूरा शुरू का छोड़ देते हैं। शुरू में जो हीलिंग होती है गंड भले के मंत्रों के साथ वह आप लेते ही नहीं है। हमें समझ में नहीं आता आपके फॉर्म कुछ लोगे तो फॉर्म डले हैं। अब फॉर्म कैसे डले? कैसे हीलिंग करते होंगे आप? फॉर्म डले हैं आपके और यहां दुनिया में तो हम से हीलिंग दे रहे थे आप लोगों को और यहां आप ऑफलाइन लेने को तैयार नहीं हो और ऑनलाइन ले रहे थे। हे भगवान यहां आके दे रहे तो ले नहीं रहे हो। देखो फिर कह रहा हूं आप 6:45 पे आए मेरी मर्यादा है मैं ज्यादा देर तो नहीं कर सकता एक घंटे जिनवाणी को देना है मुझे तो 7:45 से मुझे एंड करना ही होगा ठीक तो आप समझिए बात को इसलिए जल्दी आएंगे तो बहुत अच्छी बात है रोज यही हो रहा है रोज क्या हो रहा है मुझे फाइव स्टेप के बाद ध्यान कराना है लेकिन होता ये है मैं पहले फाइव स्टेप पर हीलिंग करता हूं हीलिंग के बाद ज्ञान कल्याण के ध्यान को समझाता हूं पूरी इन लोगों की जितनी ताकत जो एनर्जी इकटठी करते हैं पूरी पानी हो जाती है हिल जाते हैं डुल जाते हैं जो मैं चक्रों को एक्टिवेट करता हूं। वो पूरा समाप्त हो जाता है। फिर से फिर ध्यान कराता हूं। उसका कारण यह है आप लोगों का लेट आना। इसलिए आप सबको दोष लगेगा। इसलिए लेट नहीं आएंगे। समय पर आए तो बहुत अच्छी बात रहेगी। एक बात एक और बात मुझे पूछना है। तब कल्याणक के ध्यान की तैयारी नहीं हो पा रही है। और तैयारी तो हो रही है लेकिन बड़ी धीरे 50 बीजाक्षर है और सुबह वाले तो वैसे एक भी नहीं है यहां पर है क्या सुबह वाले कोई लोग? आठ द लोग हैं सुबह वाले। अब मुझे आप यह बताइए कि ज्ञान कल्याणक सुबह तो कराना है क्योंकि जिनवाणी में पांच से छ सुबह आता है वो। ठीक? और रात को 11 से 12 आता है। ऑडियंस पूरे अलग है। रात वाले अलग है और सुबह वाले अलग है। तो अब अगर आप लोग चाहे सुबह वाले तो उसमें सुबह वालों को फायदा ये जो शाम को आते हैं। फायदा क्या है? फायदा यह रहेगा कि उसमें फायदा आपको मिलेगा ये कि लगातार आपका ध्यान हो जाएगा। सुबह और शाम। तो उससे ध्यान की सिद्धि होती है। आप चाहे कल तो तत्व वाला योगा की घोषणा कर चुके हैं हम। हां विदेश वालों के लिए हां भैया जी कह रहे हैं कि रात का 11 से 12 इंडिया वालों के लिए नहीं है। वो टाइम जिनवाणी ने विदेशी लोगों की मांग से 11 से 12 किया है। क्योंकि विदेश में ध्यान पहुंचाना था उनको। इसलिए उन्होंने रात को 11 लेकिन यहां इंडिया वाले नहीं देख सकते क्या भैया यार? देख तो सकते ना 11:00 बजे टीवी खोल कर। हां उनके लिए स्पेशली है वो। विदेशी लोगों के लिए 11 से 12 का समय उधर से मांग थी कि इस समय पर देना है इसलिए वो टाइमिंग दिया गया विदेश में पहुंचाने के लिए ध्यान को तो हम ये कह रहे हैं अगर आप चाहे तो नहीं तो फिर परसों तक तब कल्याणक का नहीं बन पाएगा तो आप चाहेंगे सुबह वाले यहां बैठे हैं क्योंकि यही है बाकी सुबह वाले तो जो आते हैं वो शाम को आते ही नहीं आप लोग निर्णय दें अगर यही ज्ञान कल्याणक करना है तो परसों से ज्ञान कल्याणक आठ दिन वहां ले लेंगे और नहीं तो परसों टाटक करें क्या भावना है ज्ञान कल्याणक में ये रहेगा कंटिन्यू आपका ज्ञान कल्याणक अच्छा हो जाएगा। उससे सिद्धि होगी। एक ही को बार-बार करते हैं। सिद्धि होती है। क्या नहीं? नहीं नहीं पिंडस पूरी चीज अलग है। पिंडस प्रकरण ही अलग है। उसके लिए मुझे बहुत सारी तैयारी करनी पड़ेगी। उसमें बहुत सारी वीडियो तैयार होगी। जब तक वो वीडियो तैयार नहीं होगी तब तक पिंडस नहीं करा सकता। ठीक है ना? वो तो मैं आपके हिसाब से नहीं चलूंगा। जो मेरे पास तैयारी होगी। अभी मेरे पास ज्ञान कल्याण की तैयारी है। मैं वो करा सकता हूं परसों नहीं तो तत्व की तैयारी तत्व करा सकता हूं। और नहीं तो फिर यही तरीका आएगा कि हां समय सुबह सुबह समय से करवा लो। शाम शाम को तो ज्ञान कल्याणक बंधा हुआ है। शाम को डिस्टर्ब नहीं कर सकते। सुबह की बात चल रही है। तो अब सुबह वाले निर्णय दे। मुझे यहां आज बोलना पड़ेगा। कल जिनवानी पर एट चलेगा उसका कि ज्ञान कल्याणक कराना हो तो आठ दिन तक ज्ञान कल्याणक चलेगा। और नहीं तो टाटक में मुझे सिर्फ मात्र भगवान की फोटो लगाना है। फोटो लगाकर वो करना है क्योंकि दो-तीन दिन लगेंगे उस ध्यान में। क्या करना है? ज्ञान कल्याण की घोषणा करा दे। आठ दिन तक कर लेंगे। सुबह वाले अच्छा ये है आपको वो बीजाक्षर रट जाएंगे। आपको बार-बार करने में और अच्छा हो जाएगा। ठीक। ठीक है ना। देखते हैं और रात तक विचार कर लेते हैं ना। परसो तक घोषणा कर देंगे। अपन जिनवानी में एंट देना पड़ता है ना कि ये वाला ध्यान आना है। चलिए चलते हैं भैया आरती के लिए। कर लेंगे तो चलिए सभी लोग साथ दृष्टा सर्व ज्ञाता सर्व ध्यानी नमो [संगीत] नम दुर्लभ सागर ज्ञान धारी रागी नमो नम सर्व दष्टा सर्व ज्ञाता सर्व ज्ञानी नमो नम [संगीत] दुर्लभ सागर ज्ञान धारी वेतरागी [गाना गाने की आवाज़] नमो नमः [संगीत] सर्व द्रष्टा सर्व ज्ञाता सर्व ज्ञानी नमो नमः दुर्लभ सागर ज्ञान धारी नमो [संगीत] नमः सर्व द्या सर्व ज्ञाता सर्व ज्ञानी नमो [संगीत] नमः दुर्लभ सागर ज्ञान धारी रागी नमो नमः जय जय गुरुदेव [संगीत] जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय [संगीत] गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव जय गुरुदेव ओम सोहम ओम सोहम [संगीत] ओम सोहम ओम सोहम ओम सोहम ओम सो [गाना गाने की आवाज़] निज [संगीत] आत्म के चिंतन से तू ओम सो निज आत्म के चिंतन [संगीत] से तू ओम सो सर्व दृष्टा सर्व ज्ञाता सर्व [संगीत] ज्ञानी नमो नम सागर ज्ञान [संगीत] नमो नम सर्व द सर्व ज्ञाता सर्व ज्ञानी नमो नम दुर्लभ सागर ज्ञान धारी नमो नम जय [संगीत] गुरुदेव जय [गाना गाने की आवाज़] गुरुदेव जय गुरुदेव [संगीत] जय [गाना गाने की आवाज़] गुरुदेव गोपालन हारे [संगीत] निर्गुण और न्यारे गोपालन वाले [गाना गाने की आवाज़] निर्गुण और न्यारी [संगीत] तुम्हरे बिन हमरा नहीं तुमरे बिन हमरा कौन नहीं तुम ही हम [संगीत] हो सहारा तुम्हें हमारे [संगीत] रखवाले भक्ति दो हां शक्ति दो [संगीत] [घंटी की आवाज़] ओ भक्ति दो शक्ति दो जग के जो स्वामी हो इतनी तो [संगीत] अर्ज सुनो [संगीत] है पथ में अधियारे दे दो वरदान मैं उजियाने [संगीत] [संगीत] [संगीत] हम गरीबों [गाना गाने की आवाज़] का कोई ना सहारा [संगीत] [संगीत] हम गरीबों का कोई ना सहारा तुम्हें [गाना गाने की आवाज़] अपना समझ के पुकारा [संगीत] हम गरीबों का कोई ना सहारा तुम्हें अपना समझ [गाना गाने की आवाज़] के [संगीत] पुकारा जग से जो हारा तूने ही [संगीत] तारा जग से जो हारा तूने ही तारा तुमने [संगीत] मेरा कौन नहीं गुरु तुमने हो मेरा कौन प्रभु [संगीत] तुमरे बिन मेरा कौन बोलिए आचार्य भगवान श्री विद्यासागर जी महाराज की जय हो चले सब लोग अपने स्थान पर खड़े हो जायेंगे बड़ी भक्ति भाव के साथ आरती के लिए आगे आ जाओ आ जाओ हेल्लो चलिए सब लोग अपने स्थान पर खड़े हो जाएंगे। बढ़िया भक्ति भाव के साथ चेक चेक साउंड चेक चल विद्या सागर [गाना गाने की आवाज़] की गुर की शुभ [संगीत] मंगल दीप सजा के मैं आज उतारू आरती विद्या सागर की [संगीत] गुण आगर की शुभ मंगल दीप सजा की मैं आज उतारू आरती [संगीत] मल्ल श्री मदी के गर्भ से मुनि आई [संगीत] जा स्म [संगीत] सब जन मंगल गाए गुरु जी सब जन [गाना गाने की आवाज़] मंगल गाए ना रागी की ना द्वेष की शुभ मंगल दीप सजा के मैं आज उतारू आरती विद्या सागर की गुण आगर की [संगीत] शुभ मंगल दीप सजाएंगे [गाना गाने की आवाज़] मैं आज उतारू आरती [संगीत] [संगीत] [संगीत] गुरुवर पांच महा वत धारी आ ब्रह्म बिहारी [गाना गाने की आवाज़] मंगल पांच बार धारी आ ब्रह बिहारी खड़क [संगीत][गाना गाने की आवाज़] से पथ पर चलकर शिथिला निवारी गुरु जी [संगीत] सिथिला निवारी गृह त्यागी की वैरागी की त्यागी की बैरागी की लेती सुमन का और मैं आज उतारू औरिया विद्या सागर की गुणगर [संगीत] की शुभ मंगल दीप सजाएगी मैं आज उतारू आरती क्या बात है [संगीत] गुरुवर आज नयन से रखकर आलोकिक सुख पाया भक्ति भाव से [संगीत] भक्ति भाव से आरती करके भूला नहीं समाया गुरुवर भूला नहीं समाया ऐसे मुनिव को ऐसे ऋषिवर को हो वंदन बारंबार मैं आज उतारू आरती समय सागर [संगीत][गाना गाने की आवाज़] की गुण आगर की शुभ मंगल गीत सजाएंगे मैं आज उतारू आरती दुल सागर की गुण आगर की शुभ मंगल दीप सजाए